भागवत कथा के माध्यम से प्रेत योनि से मिल जाती  है मुक्तिै -पंडित रामानंद शास्त्री

वाराणसी ।। रोहनिया मथुरा वृंदावन से पधारे भागवताचार्य पंडित रामानंद शास्त्री जी ने बताया भागवत कथा सुनने मात्र से ही प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है - अखरी भगवती माता प्रांगण में चल रहे 16 दिवसीय कार्यक्रम में श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन बताया कि परम पवित्र कार्तिक मास जोकि मुकुंद माधव का प्रिय मास है।यह महीना व्रत जप अनुष्ठान दान प्रातः स्नान तुलसी सेवा दीपदान परिक्रमा भागवत कथा श्रवण आदि के लिए बड़ा ही पुनीत माना गया है इस महीने में अगर भागवत कथा श्रवण का अवसर मिले तो अति सौभाग्य है क्योंकि भगवान की बाल लीला इसी महीने में सबसे ज्यादा हुई जैसे वत्स चारण गौ चारण चीरहरण गिरिराज पूजन महारास आदि प्रमुख लीलाएं संपन्न हुई।कलश यात्रा के माध्यम से जन जागरण अध्यात्म प्रेम प्रसार एवं ग्राम देवता एवं ग्राम देवी की अनुज्ञा को प्राप्त करते हुए 33 कोटि देवताओं के साथ-साथ पवित्र तीर्थ नदियों अमर का आवाहन किया जाता है नगर परिक्रमा करने से सुख सौभाग्य आदि प्राप्ति एवं प्रकृति से जुड़े रहने की शिक्षा भी प्राप्त होती है।भागवत महापुराण के महात्म्य के माध्यम से सदाचार अपनाना एवं व्यसन नशा आदि से दूर रहना चाहिए आत्मदेव के पुत्र गोकर्ण जी सदाचार पर चलते थे और धुंधकारी व्यसनी हुआ जो तरह तरह के व्यसन से युक्त हुआ और बाद में अकाल मृत्यु को प्राप्त कर प्रेत योनि गया जिसका उद्धार गोकर्ण जी ने भागवत कथा सुनाकर किया।

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