शिक्षा दो प्रकार की होती है चार प्रकार से आती है - संतराम


राजेंद्र यादव की रिपोर्ट

 तलेन ।। तलेन के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में  पतंजली की ओर से लगा  बाल संस्कार शिविर में  बुद्धि बढ़ाने वाले  योगासन  वह आयुर्वेदीक व घरेलू  औषधि बताते हुए  पतंजलि के जिला योग प्रचारक संतराम आर्य ने  योग सिखाया  और कहा ईशोपनिषद कहती है, “जो अविद्या की संस्कृति मेँ लगे हुए हैं, वे अज्ञान,गरीबी,दुख के गहनतम क्षेत्र मेँ प्रवेश करेंगे । शिक्षा दो प्रकार की होती है, भौतिक तथा आध्यात्मिक। भौतिक शिक्षा जड़-विद्या कहलाती है जो पेट तृप्त करती अर्थात नौकरी दिलाती है। आध्यात्मिक विद्या आत्मा को तृप्त करती शरीर को स्वस्थ रखते पुरुषार्थ से कमाया धन को अस्पताल, व्यसन,व्यभिचार से बचाती और आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है जिसको योग विद्या कहते हैं। हमारा शरीर पदार्थ तथा आत्मा का सम्मेल है। जब तक आत्मा वहाँ रहती है, शरीर हिलता-डुलता है। भौतिक विद्या से कमाया धन का भोग होता है| उदाहरणार्थ मनुष्य के कोट तथा पैंट तब तक हिलते-डुलते हैं, जब तक मनुष्य उन्हें पहने रहता है। एसा लगता है की कोट तथा पैंट ही हिल डुल रहे हैं, किंतु वास्तव मेँ यह तो शरीर है, जो हिलाता-डुलाता है। इसी तरह ये शरीर चलता फिरता है क्यूंकि आत्मा इसे चला फिर रही है। इसलिए हमें पेट की विद्या के साथ साथ आत्मा की विद्या आध्यात्मिक विद्या योग विद्या भी सीखनी है ताकि हम लंबा जी सकें चारित्रिक पतन वह अशलिल अपराध व शरीर स्वस्थ रख सकें योग प्रचारक ने कहा विद्या सुनने से लिखने पढ़ने साक्षात्कार से आती है| इस अवसर पर पूरा विद्यालय परिवार उपस्थित रहा विद्यालय के प्रधानाचार्य प्राचार्य चंद्र सिंह सोनगरा,मुरलीधर लववंशी, प्रभुनाथ सिंह चंद्रावत,राजेंद्र पवार,दिनेश लववंशी,पदम सिंह लववंशी, भगवान सिंह लववंशी, रुपेश राठौर, पवन यादव, राम सिंह उमठ, माया शर्मा,रचना सोनी, रेणु यादव,मुकेश धनगर, राजेश जादम, धन सिंह यादव, प्रताप सिंह लववंशी, घनश्याम पवार, गोपाल सिंह यादव,राकेश तिवारी,राहुल यादव,गोविन्द राजपूत,जसवंत सिंह उमठ,  सीमा जोशी,चांदनी विश्वकर्मा,रेखा चौहान आदि उपस्थित रहे ।

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