आयातक नाराज और निर्यातक हुए मायूस

रिपोर्ट-दीपक यादव

भदोही। वाराणसी के बड़ा लालपुर स्थित ट्रेड फेसिलिटी सेंटर में वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा 21 से 24 अक्टूबर को इंडिया कार्पेट एक्सपो मेला का आयोजन किया गया। मेला मे घोर दुर्व्यवस्था के कारण मेले मे स्टाल लगाये निर्यातक काफी मायूस रहे वही विदेशी आयातक भी फेयर कमेटी से खफा दिखेकाग्रेस के वरिष्ठ नेता मुशीर इकबाल ने कहा कि पहली बार वाराणसी का कालीन मेला राजनीति की भेट चढ़ गया प्रतिवर्ष अक्टूबर माह मे वाराणसी मे लगने वाले कार्पेट फेयर को इस साल वाराणसी शहर से दूर बङा लालपुर स्थित ट्रेड फेसिलिटी सेन्टर मे आयोजित किया गया जो किसी भी दृष्टि से कालीन फेयर के लिए उपयुक्त स्थान  सिध्द  नही हुआ तथा कई खामियो के कारण इस बार का मेला फ्लाप साबित हुआ 

कालीन ट्रेड फेसिलिटी सेन्टर का निर्माण  बनारसी साङी व अन्य वस्तुओं के  प्रदर्शनी के उद्देश्य से निर्माण कराया गया है व  कालीन मेला  के लिए उपयुक्त स्थान नही है निर्यातकों को पार्किंग,  वारामदे और बेसमेन्ट मे अपना स्टाल लगाना पडा तथा नेट वर्किंग प्राब्लम  होने के कारण मोबाइल व कम्प्यूटर  काम नही कर रहे थे जिस कारण निर्यातक व आयातक दोनो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा,जबकि कालीन मेला के लिए ही भदोही मे एक्पोमार्ट दो साल से बन कर तैयार है सारी सुविधाएं एक्पोमार्ट मे है फिर भी  उसमे कालीन फेयर न लगाकर बनारस शहर से दूर ग्रामीण इलाके मे लगाकर कालीन उद्योग के साथ राजनीतिक साजिश कीगई,उन्होने कहा कालीन  निर्यातक बनारस के मेले का बङी बेसब्री से इंतजार करते है इस उमीद से की फेयर से साल भर  का कारोबार मिलेगा इसलिए निर्यातक 6 महिने पहले से ही नये नये डिजाइन व नये  नये तकनीक से कालीन  सैम्पल बनाना शुरू कर देते है तथा सैम्पल तैयार करने पर लाखो रूपया खर्च करते है।भदोही व आसपास के जनपद के कालीन निर्यातक वहा पर   अपना स्टाल लगाने को तैयार नही थे लेकिन शासन सत्ता के दबाव मे वहा पर लगाने पर विवश हुए उन्होने कहा दुर्व्यवस्था के कारण उमीद लगाये निर्यातक जहा मायूस दिखे वही आयातक खफा रहे सीईपीसी हमेशा कि तरह इस साल भी 450करोड का कारोबार होने का फर्जी आकङे का दावा  पेश किया है जबकि  हकीकत तो यह हैकि भदोही से कालीन का निर्यात  दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है और उद्योग मे लगे लोग बेरोजगारी का दंश झेल रहे है कुछ बङे निर्यातक को छोङ दे तो कालीन उद्योग का बहुत बुरा हाल है।उन्होंने कहा कि इसका दूरगामी असर कालीन मेला और कालीन उद्योग पर पङ सकता है।मुशीर इकबाल ने कहा कि कालीन उद्योग को राजनीति से दूर रखने की आवश्यकता है नही तो आने वाले दिनो मे कालीन फेयर मे न तो निर्यातक स्टाल लगायेंगे और नाही विदेशी आयातक ही आयेगे

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