भदोही के भाजपा नेता भाजपा से जाने जाते है न कि नेताओं से - भाजपा अंकित पाण्डेय

भदोही जिले में जहां वर्तमान सांसद को लेकर काफी लोगों में नाराजगी वही भाजपा के कुछ नेता प्रधानमंत्री के नाम के साथ सांसद जी का नाम भुनाने के चक्कर में है। वर्तमान सांसद का विरोध यदि कोई करता है तो उसका भी अधिकार है, सांसद का विरोध करने का मतलब यह नही है की लोग भाजपा या मोदी का विरोध कर रहे है। रही बात कुछ सांसद समर्थकों की तो यह अलग बात है कि सांसद जी के कार्य से उन्हे कुछ लाभ हुआ होगा लेकिन विरोध करने वाले भी जायज है कि पांच साल में विकास की बात तो दूर सांसद जी का दर्शन न मिलना तो बडी बात है।भाजपा के जिले के नेता, विधायक, सांसद इस विचार में न रहे कि उनके नाम पर लोग भाजपा को वोट देते है। भाजपा के कार्यो को देखकर लोग वोट या समर्थन देते है न कि जिले के नेता, विधायक या सांसद के कहने पर और दूसरी बात यह भी है लोग इस भ्रम में न रहे कि भदोही हमेशा बाहरी नेताओं की रखैल बनी रहेगी। जिले के नेता है जिनमें नेतृत्व करने की क्षमता है। भदोही के लोगों को चाहिए कि जिले के बाहरी किसी भी नेता का समर्थन न करें। क्योकि जब जब बाहरी जितेंगे कुछ लोगों को केवल खुश रखेंगे बाकी से कोई मतलब नही। केवल चुनाव के समय पुरानी फाइल खोलकर मोदी के नाम वोट मांगेंगे। अपने दम पर तो कुछ नही कह पायेंगे। लोग इस बार अपना भ्रम छोड दे कि वीरेन्द्र सिंह यदि लोकसभा से टिकट पायेंगे तो जीत जायेंगे क्योकिं कट्टर भाजपा समर्थक भी वीरेन्द्र सिंह के टिकट पाने से नोटा बटन दबाना बेहतर समझेंगें बजाय वीरेन्द्र को वोट देने। और वैसे भी अभी टिकट के दौड में कई महारथी का नाम चल रहा है किसको टिकट नशीब होता है, यह समय ही बताएगा? लेकिन जिले की जनता इस बार बाहरियों को जिताने के मूढ मे नही है। और यह सोलह आने सच भी है। क्योकि जिले का नेता जितना विकास करेगा अन्य जिले का नेता कत्तई नही करेगा। यह फिर से भाजपा के नेता समझ ले कि उनके कहने पर लोग भाजपा को वोट नही देते भाजपा का काम भाजपा को वोट दिलाता है।

रिपोर्टर

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