समाज बंधुओं सावधान !! काम पर लग गए हैं जयचंद ?

मुंबई ।। ऐसे तो चुनाव आते ही तमाम तरह के हथकंडे अपनाए जाने शुरू हो जाते हैं लेकिन जब कोई समाज को त्याग कर जयचंद का किरदार अपना ले तो उसकी स्थिति एक न एक दिन धोबी के कुत्ते जैसी हो जाती है जो न घर का रह जाता है न घाट का। इतिहास गवाह है कि जयचंद के किरदार को आत्मसात करने वाले भीषण दुर्गति के शिकार होते हैं।

आजकल कुछ ऐसी ही स्थिति हिंदी भाषी समाज के लोगों के साथ प्रतिबिंबित हो रही है जयचंद निजी स्वार्थ के वशीभूत हो कर समाज का ही दुरूपयोग कर निजी स्वार्थ सिद्धि में क्रियाशील हो चुके हैं। एक तरफ तो वह सभा मे खुलेआम जयजयकार करने से नही चूकते वहीं दूसरी तरफ समाज का सौदा करने में भी गुरेज नही करते।

वैसे तो चुनाव में सभी अपना मत किसी को भी देने के लिए स्वतंत्र है लेकिन जब बात समाज और समाजहित की आती है तो अन्य वर्गों की तरह हिंदी भाषी समाज को भी एकजुट होकर समाज की प्रगति उन्नति में अग्रसर होना चाहिए और सभाओं में ऐसे वक्तव्य देने वाले ही जब समाज के सौदागर बन जाएं तो उनके साथ क्या सलूक होना चाहिए यह भी समाज को तय करने का समय आ चुका है और किस तरह से ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाय इस पर चर्चा करने का समय आ चुका है।

जब पिछवाड़े में बांस होता है तो बचाव के लिए समाज याद आता है और जब मुद्रा चलकर आती दिखती है तो समाज दरकिनार हो जाता है कैसी मनःस्थिति है ये ?

अभी सही समय है निज स्वार्थ को त्याग कर समाज की मजबूती के लिए काम करें वह चाहे जैसे भी संभव हो। विगत वर्षों में कोई भी हिंदी भाषी नेता समाज के लिए अन्य पार्टियों की भीषण चरंचम्पी करने के बाद भी कोई अमूलचूल कार्य नही कर सका अब वक्त है एक बार समाज के प्रतिनिधित्व को भी स्वीकार कर लिया जाय। कट्टरता बहुत देखी है कि कौन कितना कट्टर है मिमियाते हुए भी कुछ हो न सका अन्य लोगों की शरण मे। कितनों ने स्टेज पर मार खाई, कितने फर्जी केसों में फंसे तब जिसके चरण पखार रहे थे वह कहाँ थे कट्टरों ?? समाज को किए गए वादों को पूरा कराने के लिए कितने कट्टर लोगों ने अपनी जान दे दी ?? 

कहाँ चला गया था स्वाभिमान जब उत्तर भारतीय के मंच पर भीषण सम्मान लेने के बाद नेता जी अपने फेसबुक पर दूसरों के नाम अपडेट कर रहे थे? चाटुकारिता छोड़ दो चाटुकारों नही तो आने वाली नस्लें जब तुम्हारी कहानी सुनेगी तो तुम्हारे नाम पर कुत्तों को मूतने को कहेंगी।

जयचंदो एकजुट होकर अपने सम्मान को बढ़ाओ वरना युही ठोकरे खाओ अगर अभी भी नही संभले तो कभी संभल नही पाओगे ।

रिपोर्टर

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