पूर्वांचल,पश्चिमांचल की राजनीत में रमाकांत के रुप में कांग्रेस की तलाश हुई पूरी

राममोहन अग्निहोत्री की रिपोर्ट

गोपीगंज ।। उत्तरप्रदेश प्रदेश में भाजपा -सपा- बसपा की जनता के बीच अच्छी पकड़ और राजनीतिक साख के चलते हासियें पर चली गई कांग्रेस पार्टी को लगता है संजीवनी शेरे पूर्वाचंल रमाकांत यादव प्रभावशाली छत्रप के रूप में मिलने जा रही है। जिससे पूर्वांचल, उत्तरांचल, पश्चिमांचल में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होने की संभावना अन्य पार्टियों के मुकाबले काफी सशक्त रुप से  बढ़ गई है और आने वाले समय में जनाधार के कांग्रेस पार्टी के पक्ष में तेजी के साथ बढ़ने के संकेत मिले हैं।वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज भाजपा के बाहुबली रमाकांत यादव कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। आजमगढ़ लोकसभा सीट से प्रत्याशी न बनाए जाने के बाद से ही रमाकांत पार्टी से नाराज चल रहे थे। पूर्वांचल में भाजपा के बड़े ओबीसी चेहरे में गिने जाने वाले रमाकांत के जाने से पार्टी को बड़ा झटका माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस उन्हे भदोही लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है।बता दें कि रमाकांत यादव ने वर्ष 1984 में जगजीवन राम के नेतृत्व में राजनीति शुरू की थी। वर्ष 1984 में वे पहली बार फूलपुर विधानसभा से चुनाव में उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद वे इस क्षेत्र से चार बार विधायक चुने गए। रमाकांत यादव चार बार आजमगढ़ सीट से सांसद भी चुने गए है। रमाकांत के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रजीत यादव ही सिर्फ चार बार इस सीट से सांसद चुने गए है। रमाकांत यादव का अपना जनाधार है।यही वजह है कि वे जिस भी दी में गए चुनाव जीतने में सफल रहे। वर्ष 2008 में रमाकांत यादव बीजेपी में शामिल हुए थे और वर्ष 2009 के चुनाव में पहली बार आजमगढ़ सीट बीजेपी के खाते में डाल दी थी। रमाकांत वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भी बीजेपी के टिकट पर लड़े थे लेकिन मुलायम सिंह से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2019 में उन्हें टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन सीएम योगी ने रमाकांत के टिकट का विरोध किया और फिल्म स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को टिकट दिला दिया।इसके बाद से ही रमाकांत यादव पार्टी से नाराज चल रहे है। आठ अप्रैल को वे निरहुआ के रोड शो में भी शामिल नहीं हुए थे। आशंका बढ़ गई कि रमाकांत यादव कहीं दूसरा पड़ाव तलाश सकते हैं हालांकि 25 मार्च को उन्होंने एक बयान दिया की बड़ो बड़ो का टिकट कट गया तो उनका भी कट गया ऐसे में वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे । शुक्रवार को उन्होने लखनऊ प्रदेश मुख्य़ालय में जाकर कांग्रेस का दामन थाम लिया। कहा जा रहा कि उनके कांग्रेस में आने से पूर्वांचल में कांग्रेस को नई ताकत मिलेगी।

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