मानवता का पाठ पढाने के लिए ही ईश्वर का अवतार होता है -कर्मयोगी चकभवानीदास

रिपोर्ट-राम मोहन अग्निहोत्री

ज्ञानपुर,मोढ/भदोही ।। समय समय पर ईश्वर अवतार लेकर सामाजिक विसंगतियों को दूर करते हुए हमे जीवन यापन की कला सिखाते है। मात्र निशाचरों के वध हेतु ही नही वरन् मनुष्यो को शिछा देने के लिए ही भगवान इस धराधाम पर आते है रामजी के ही जीवन को देखें तो उनके जीवन मे जितनी विषमताएं थी उतनी कदाचित किसी के जीवन मे नही होंगी परन्तु रामजी के   साहस एवं पराक्रम को सराहना होगा कि इन विषमताओं को झेलते हुए सदा मुस्कराते रहें जो ऐसा करेगा वही ईश्वरत्व को प्राप्त होगा । उक्त बातें गाँव मे चल रही भागवत कथा  के चौथे दिन पं प्रमोद शास्त्री जी ने कही। वराह  कपिल वामन नरसिंह राम कृष्ण के अवतारों की चर्चा हुई, जिसमे ध्रुव प्रह्लाद जैसे भक्तों की कथा भी बहुत ही सारगर्भित शब्दो से कि गई, यदि निश्चय दृढ़ है को भगवान अवश्य मिलेगा यह ध्रुव की कथा सिखलाती है, विश्वास प्रबल है तो भगवान  खम्भे से भी प्रकट हो जाता है यह प्रह्लाद जी की कथा से समझ मे आता है। राम जी तो आदर्श ही है श्रीकृष्ण के जीवन मे भी बहुत कठिनाईयाँ आईं जिसका जन्म ही कारागार मे समझो किताना कष्ट मिलेगा पूरा जीवन कष्चों से भारा रहे परन्तु सदैव प्रशन्न रहना यह श्री कृष्ण के चरित्र सिखने को मिलता है।ऐसी कई जीवनोपयोगी बातें शास्त्री जी ने कहीं।  कथा के पूर्व यजमान छोटेलाल यादव ने ग्रंथ पूजन किया तथा आरती कर महाराज जी से आशिर्वाद लिया।

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