वाराणसी में लोकतंत्र की परीक्षा में सेवापुरी फर्स्‍ट डिवीजन पास

वाराणसी ।। चिता भस्म को तन पर लपेट होली खेलने, घाट की सीढिय़ों पर अड़ी और गंगा की लहरों में मौज करने वाले बनारसियों ने लोकतंत्र के महापर्व में डुबकी लगाई। हालांकि काशी फर्स्‍ट डिवीजन के जरूरी 60 फीसद का आंकड़ा पार नहीं कर सका। वर्ष 2014 के आंकड़े को भी बनारस पार नहीं कर सका। तमाम मतदाता जागरूकता अभियान चलने के बाद भी निर्वाचन कार्यालयों की खामियां, तीस प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की उदासीनता व मौसम के चलते चालीस फीसद मत नहीं पड़ सके और शत - प्रतिशत मतदान का संकल्प अधूरा रह गया। 

सुख सुविधा से लैस शहरी क्षेत्र के मतदाताओं को ग्रामीण क्षेत्र के जुझारू मतदाताओं ने आइना दिखाते हुए लोकतंत्र के महापर्व को पूरे हर्षोल्लास से मनाया। सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता लोकतंत्र की परीक्षा में फस्र्ट डिवीजन पास हुए तो कैंट विस क्षेत्र के मतदाता कक्षा में सबसे पीछे बैठने वाले छात्र की तरह सबसे पीछे रहा। मजेदार यह कि पिछले यानि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी सेवापुरी ही प्रथम श्रेणी पास हुआ था और कैंट उत्तरी बैक बेंचर थे।जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से जारी आंकड़े बता रहे कि सेवापुरी और रोहनिया शहर के तीन विस क्षेत्र उत्तरी, दक्षिणी और कैंट पर भारी पड़े। कैंट क्षेत्र के मतदाताओं से सर्वाधिक उम्मीद थी कि वे बनारस के भाग्य विधाता बनेंगे क्योंकि इसी विस क्षेत्र में सबसे अधिक मतदाता हैं, बावजूद इसके इसी क्षेत्र के मतदाता सबसे पीछे रहे।

भाजपा के लिए मंथन का विषय है क्योंकि लोकतंत्र की दौड़ में सबसे आगे सहयोगी दल अपना दल नील रतन नीलू का विधानसभा क्षेत्र सेवापुरी रहा। शहरी क्षेत्र में राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी का विस क्षेत्र दक्षिणी आगे जरूर रहा लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों  से पीछे। दक्षिण 2014 के चुनाव में सेवापुरी से कुछ ही पीछे था। शहर में रविंद्र जायसवाल का विस क्षेत्र उत्तरी दूसरे नंबर पर रहा। चारों विस क्षेत्र के विधायक भाजपा के हैं और कोई भी विधायक मोदी को साठ फीसद अंक नहीं दिला पाया।

रिपोर्टर

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