अंत कलह , गुटबाजी तथा अनदेखी के कारण कांग्रेस की हार

भिवंडी ।। २३ भिवंडी लोकसभा सभा में कांग्रेस पार्टी की हार अंतकलह , गुटबाजी तथा अनदेखी के कारण मानी जा रही है। वही पर कांग्रेसी उम्मीदवार सुरेश टावरे के समर्थन में प्रचार करने तथा वोट मांगने‌ के लिए महाराष्ट्र व दिल्ली के बड़े कांग्रेसी नेताओं द्वारा भी रुचि नहीं दिखाई गई । इसके साथ ही भिवंडी कांग्रेस पार्टी द्वारा विधानसभा क्षेत्रों में कोई बड़ी सभा का आयोजन नही किया गया । 

  भिवंडी कांग्रेस पार्टी द्वारा हिन्दू तथा हिन्दी भाषीय मतदाताओं की उपेक्षा की गई । कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार सुरेश टावरे द्वारा हिन्दू तथा हिन्दी भाषीय क्षेत्रों में ना तो प्रचार किया, ना ही रैली का आयोजन किया गया । जिसके कारण हिन्दू तथा हिन्दी भाषीय मतदाताओं ने नाराज होकर भाजपा को वोट दिया । भिवंडी कांग्रेस पार्टी द्वारा हिन्दू तथा हिंदी भाषीय मतदाताओं की हमेशा उपेक्षा की गई । इसके वजह से ही भिवंडी पुर्व विधानसभा चुनाव में शोहेब खान उर्फ गुडडू को करारी हार का सामना करना पड़ा था। किन्तु लोक सभा चुनाव में  भिवंडी कांग्रेस द्वारा सीख ना लेते हुए सिर्फ मुस्लिम मतदाताओं के सहारे चुनाव जीतने के फिराक में सुरेश टावरे को हार का सामना करना पड़ा । शहर के काई हिंदी भाषीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भिवंडी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शोहेब खान उर्फ गुडडू सिर्फ उर्दू अख़बारों के सहारे अपनी खबर छपवाने तथा मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में राजनीति करने में ही प्राथमिकता देते हैं। जिसके कारण कांग्रेस पार्टी से हिन्दी भाषीय तथा हिन्दू कार्यकर्ताओं की दूरी बनती जा रही है।
        कांग्रेसी पार्टी उम्मीदवार सुरेश टावरे के नामांकन पुर्व ही कांग्रेसी खेमे में गुटबाजी दिख रही थीं। ३५ नगरसेवकों व काई पदाधिकारियो द्वारा सुरेश टावरे को टिकट देने का विरोध किया जा रहा था । वही पर सुरेश टावरे के विरोध में शिवसेना पार्टी के कद्दावर व धनाढ्य नेता सुरेश म्हात्रे को टिकट दिलाने में नामांकन के दिन तक आधे कांग्रेसी दिल्ली तथा महाराष्ट्र प्रदेश कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। सुरेश म्हात्रे के टिकट नहीं दिये जाने पर सामुहिक रुप से पार्टी तथा पद से इस्तीफा देने की धमकी देने वाले नगर सेवकों तथा पदाधिकारियो को कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार सुरेश टावरे मनाने में असफल साबित होने के कारण हार का सामना करना पड़ा । 
   लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार सुरेश टावरे के सुस्त प्रचार तथा मित्र पक्षों को अनदेखी किया गया । प्रचार के लिए कोई पुख्ता रणनीति तथा मित्र पक्षों का सहयोग नहीं लिया गया। वही पर पांच साल से मुरबाड़ तथा शाहपुर विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को जोड़ने तथा एकत्रित करने का कार्य भी सुरेश टावरे को हार से बचा नहीं सकी। 

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