बंदियों से धन उगाही की शिकायत आई सामने,कभी भी किसी भी जेल में हो सकता है बवाल

जौनपुर ।। पहले ढिलाई और फिर योगी आदित्यनाथ सरकार के आंखें तरेरने पर अन्य जेलों को तरह जिला कारागार में की जा रही जरूरत से ज्यादा सख्ती से बंदियों में पनप रहा आक्रोश सन 2002 की घटना को दोहराने का कारण बन सकता है। तब बंदियों ने बगावत कर एक बंदी रक्षक को मार डाला था और करीब 16 घंटे तक जेल पर एक तरह से कब्जा कर लिया था। हालात नियंत्रित करने में जिला प्रशासन को नाको चने चबाने पड़े थे।

मालूम हो कि पिछले सप्ताह जिलाधिकारी अरविद मलप्पा बंगारी व एसपी विपिन कुमार मिश्र ने मातहतों के साथ जिला कारागार का आकस्मिक निरीक्षण किया था। चेकिग में एक बैरक में बंदी के पास से एक मोबाइल फोन व सिमकार्ड मिला था। साथ ही जेलर के कार्यालय से एक दर्जन मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए थे। पूछताछ में जेलर ने जिलाधिकारी को बताया कि दो दिन पूर्व किए गए औचक निरीक्षण में इन मोबाइल फोनों के बरामद होने पर अग्रिम कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल किया था कि उन्हें उसी दिन इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। इसके लिए उन्होंने कारागार प्रशासन से तीन दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा था। साथ ही अपनी रिपोर्ट उसी दिन शासन को जरिए ई-मेल भेज दी थी।जिलाधिकारी के तेवर को देखते हुए जिला कारागार प्रशासन ने जरूरत से ज्यादा सख्ती शुरु कर दी। चेकिग के नाम पर रात में बैरकों को खंगाला जाने लगा। शनिवार की रात करीब 12 बजे अचानक एसपी विपिन कुमार मिश्र ने मातहतों संग फिर छापेमारी कर दी थी। इतना ही नहीं बंदियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए क्राइम ब्रांच के एक सिपाही को जेल परिसर के भीतर लगा दिया गया है। इस अतिरिक्त चौकसी से बंदियों के तेवर एक बार फिर बगावती होते नजर आ रहे हैं।

देर रात तक जेल में जमे रहे डीआइजी डीआइजी (जेल) वीएस यादव व सेंट्रल जेल के अधीक्षक अंबरीश गौड़ बंदियों के साथ सहानुभूति दिखाते हुए उसका गुस्सा शांत करने की कोशिशों में जुटे रहे। देर रात तक वे जेल में ही जमे रहे। काफी प्रयास के बाद भी बैरक नंबर तीन के जिद पर अड़े बंदियों को मनाने का प्रयास किया जा रहा है। भूख हड़ताल का खुलासा किया पेशी पर आए बंदियों नेदीवानी न्यायालय में सोमवार को पेशी पर आए बंदियों ने रविवार की शाम से की जा रही भूख हड़ताल का खुलासा किया। नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बंदियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। जेल में मैन्युअल के हिसाब से खाने और सोने भी नहीं दिया जा रहा है। मैन्युअल की व्यवस्था के अनुसार अनुमन्य सुविधाएं देने के लिए भी बंदियों से धन उगाही की जाती है। मुलाकातियों ने भी की शिकायत

जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों से मिलने आए उनके परिजनों का गुस्सा मीडिया कर्मियों के सामने फूट पड़ा। डीआइजी जेल के आने की सूचना पर पहुंचे मीडिया कर्मियों से मुलाकातियों ने कहा कि बंदी रक्षक उन्हें भी परेशान करते हैं।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट