इनके लिए तो साक्षात देवी थीं सुषमा

देवरिया ।। रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के शहबाजपुर गांव निवासी रामविलास गुप्ता के परिवार के लिए पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन की खबर सदमे जैसा है। इस परिवार के लिए सुषमा स्वराज का स्थान देवी से कम नहीं। आखिर उन्हीं के प्रयासों से वर्षों बाद घर में खुशियां लौटी थी। सुबह की किरण के साथ जैसे ही यह खबर उनके घर पहुंची, पूरा परिवार गम में डूब गया।

रोजगार की तलाश में रामविलास गुप्ता वर्ष 2012 में सऊदी अरब गए थे। गुटुफ ट्रेडिंग कंपनी में ग्रेडर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत रामविलास को वर्ष 2014 में सड़क हादसे में एक बच्ची की मौत के बाद गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। कोर्ट ने उन्हें डेढ़ लाख रियाल का जुर्माना भरने का आदेश दिया। दूसरों से उधार लेकर रोजगार के लिए विदेश गए रामविलास ने जब यह सजा सुनी तो पैरों तले जमीन खिसक गए। कंपनी ने मदद से हाथ खींच लिए और परिवार इतना सक्षम नहीं था कि यह राशि एकत्रित कर सके। स्वदेश लौटने की सारी उम्मीद उन्हें टूटती दिख रही थी। घर पर दो मासूम बच्चियों नैंसी और ट्विंकल के साथ पत्नी सुमन बदहवास थी। जब कोई सहारा नहीं दिख रहा था तो उन्होंने स्थानीय भाजपा नेताओं की मदद से तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से ट्वीटर पर संपर्क साधा। मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए सुषमा स्वराज ने सऊदी के भारतीय दूतावास से पूरे मामले की रिपोर्ट ली और त्वरित गति से कार्रवाई शुरू कराई। उनकी कोशिशों का असर था कि मार्च 2019 में रामविलास की सकुशल स्वदेश वापसी हुई। लंबे समय तक सारी खुशियां भूल चुके इस परिवार में फिर से मुस्कान बिखर आई। बुधवार की सुबह जब उन्हें सुषमा स्वराज के निधन की खबर मिली तो वह सन्न रह गए। सुमन के मुताबिक सुषमा स्वराज से उनकी कोई जान-पहचान या मुलाकात नहीं थी, बावजूद उन्होंने ऐसी मदद कि शायद कोई अपना भी नहीं कर पाता। उनके लिए सुषमा का रुप किसी देवी से कम नहीं था। रुंधे गले से रामविलास ने बताया कि सऊदी से वापस लौटने की उम्मीद ही नहीं थी, मगर सुषमा स्वराज की व्यक्तिगत रुचि और प्रयासों से संभव हो पाया। सोचा था कि स्वदेश लौटने के बाद उनसे मिलकर धन्यवाद दूंगा, लेकिन यह हसरत पूरी नहीं हो सकी। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं।

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