भावी नगरसेवकों के लिए विधायक रईस शेख बने ‘ट्रंप कार्ड’

भिवंडी की राजनीति में पोस्टरों से लेकर सोशल मीडिया तक मचा सियासी घमासान


भिवंडी। आगामी भिवंडी मनपा चुनाव को लेकर शहर की राजनीति इन दिनों खासा गर्माई हुई है। भिवंडी पूर्व और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों के बैनर-पोस्टरों पर सपा विधायक रईस कासम शेख की तस्वीरें बड़े पैमाने पर दिखाई दे रही है। इससे राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया है। शहर में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या सपा विधायक रईस कासम शेख ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ लिया है, या फिर वे कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि अब तक विधायक की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के हालिया टिकट बंटवारे में विधायक रईस शेख के कई करीबी समर्थकों को टिकट नहीं मिलने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि इसी नाराजगी के चलते विधायक खेमे में बेचैनी देखी जा रही है। इस बीच सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी का बयान भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने दो टूक कहा है कि “पार्टी में टिकट का फैसला संगठन करता है, न कि कोई विधायक।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर अनुशासन का संदेश माना जा रहा है।

राजनीतिक सूत्रों की मानें तो बीते कुछ दिनों में भिवंडी की राजनीति में अचानक बड़ा उफान देखने को मिला है। आरोप है कि सपा विधायक रईस शेख ने कांग्रेस का बी-फॉर्म हासिल कर अपने समर्थकों को अपनी ही पार्टी के अधिकृत सपा उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार दिया है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इसे भिवंडी की राजनीति में एक बड़ा और असामान्य घटनाक्रम माना जाएगा। भिवंडी पूर्व और पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में कई ऐसे उम्मीदवारों के बैनर नजर आ रहे हैं, जो भले ही अलग-अलग दलों से ताल्लुक रखते हों, लेकिन सभी पर विधायक रईस शेख की तस्वीर प्रमुखता से लगी हुई है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आगामी नगरसेवक चुनावों में विधायक की भूमिका बेहद निर्णायक रहने वाली है। फिलहाल सपा विधायक रईस कासम शेख की चुप्पी ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि विधायक खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं, तो भिवंडी की नगर राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं।

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