NOTA विकल्प के बावजूद निर्विरोध चुनाव पर सवाल, राज्य चुनाव आयोग से शिकायत
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Jan 03, 2026
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भिवंडी। नगर निकाय चुनावों में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि केवल एक ही उम्मीदवार शेष रहता है, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने की परंपरा पर सवाल उठाए गए हैं। भिवंडी के मतदाता फारुक पठाण ने इस संबंध में महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग, मुंबई को लिखित शिकायत देकर मतदान कराए जाने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में NOTA (नन ऑफ द एबव) का विकल्प अनिवार्य किया है, जिससे मतदाताओं को किसी भी उम्मीदवार को अस्वीकार करने का अधिकार प्राप्त हुआ है। ऐसी स्थिति में यदि केवल एक उम्मीदवार शेष रहने पर उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है, तो यह मतदाताओं को NOTA के माध्यम से मतदान करने से वंचित करने जैसा होगा। फारुक पठाण ने अपने पत्र में कहा है कि लोकतंत्र में मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। NOTA विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद बिना मतदान कराए किसी उम्मीदवार को विजयी घोषित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि संबंधित महानगरपालिका के चुनाव निर्णय अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं कि ऐसी परिस्थिति में भी मतदान कराया जाए, ताकि मतदाता या तो शेष उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकें या फिर NOTA के माध्यम से अपनी असहमति दर्ज करा सकें । शिकायतकर्ता के अनुसार वह प्रभाग क्रमांक 16 के पंजीकृत मतदाता हैं। उन्होंने आयोग से इस विषय पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक आदेश जारी करने की अपील की है। इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य निर्वाचन आयोग क्या निर्णय लेता है, क्योंकि यह मुद्दा भविष्य में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया पर असर डाल सकता है।


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