गेहूं के भूसे से कागज बनाने का नवाचार अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा

राजगढ़ । शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, राजगढ़ के विद्यार्थियों ने कृषि अपशिष्ट से हस्तनिर्मित कागज तैयार करने का नवाचार प्रस्तुत कर जिले को गौरवान्वित किया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत तैयार इस परियोजना का प्रस्तुतीकरण सूरत स्थित सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में किया गया। विद्यार्थियों की परियोजना का शीर्षक ‘गेहूं के भूसे से टिकाऊ हस्तनिर्मित कागज का उत्पादन : अपशिष्ट से उपयोगी उत्पाद की ओर’ है। इसमें गेहूं की फसल से प्राप्त भूसे का उपयोग कर हस्तनिर्मित कागज तैयार करने की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया। इस नवाचार का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट का उपयोगी उत्पाद में रूपांतरण करने के साथ पर्यावरण प्रदूषण को कम करना तथा संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।

16 एवं 17 अक्टूबर, 2026 को आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ऊर्जा, पर्यावरण एवं सतत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए जा रहे शोध और नवाचारों को मंच प्रदान किया गया।सम्मेलन का आयोजन सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग द्वारा किया गया। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर एवं डॉ. बी.आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर की सहभागिता भी रही। परियोजना में रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के तृतीय वर्ष के विद्यार्थी पूजा ठाकरे, दीपक धाकड़, ललित धाकड़ एवं अलका ठाकरे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विभाग के अतिथि व्याख्याता डॉ. रवि के. परिहार एवं श्री मुकेश द्विवेदी ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। परियोजना का ऑनलाइन मौखिक प्रस्तुतीकरण पूजा ठाकरे द्वारा किया गया, जिसके लिए उन्हें सम्मेलन आयोजक समिति की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

यह पहल तकनीकी शिक्षा आयुक्त भोपाल श्री अवधेश शर्मा एवं कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन तथा महाविद्यालय के प्राचार्य श्री राजू जैतवार के नेतृत्व में आगे बढ़ाई गई। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को नवाचार आधारित परियोजनाएं तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया तथा आवश्यक सहयोग एवं संसाधन उपलब्ध कराए गए। प्राचार्य श्री राजू जैतवार ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों एवं मार्गदर्शकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। ऐसे प्रयास विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं।विद्यार्थियों की यह उपलब्धि महाविद्यालय के साथ जिले के लिए भी गौरव का विषय है। यह साबित करती है कि उचित मार्गदर्शन एवं अवसर मिलने पर पॉलिटेक्निक के विद्यार्थी भी अपने नवाचार को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकते हैं।

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