अजब जनता की गजब नेतृत्व कर्ता राष्ट्र में घुसपैठिए बैठाने को तैयार

संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की लेखनी से 

दुर्गावती(कैमूर)-- चुनाव आयोग के कड़क फैसले को सामान्य बनाना सरकार के लिए उचित कदम नहीं। लेकिन विपक्ष के तेवर ने इसे सामान्य बनाने पर मजबूर कर दिया। क्या सरकार को विपक्ष का फैसला मानना जरूरी था या वोट की मजबूरी ने चुनाव आयोग और सरकार से कराया।क्या उम्मीदवारों के विषय में चुनाव आयोग को जानना जरूरी नहीं या चुनाव आयोग को अधिकार नहीं है, जानने का यदि है अधिकार तो क्यों नहीं पूछेगा। विपक्ष कहता है कि चुनाव के समय में ऐसा नहीं करना चाहिए तो कब करना चाहिए। इसे चुनाव आयोग निर्धारित करेगा या विपक्ष के नेता लोग करेंगे, ये तो घुसपैठियों को भगाने की एक चाल है विपक्ष ऐसा कहता हैं, तो क्या घुसपैठी देश में रहने चाहिए, राष्ट्र के नेतृत्व कर्ताओं को साफ-साफ बोलना चाहिए, क्या यह एक जनता को भरमाने वाली चाल नहीं है। क्या देश की जनता से साक्ष्य मांगना अपराध है, तो क्या साक्ष्य विपक्ष से मांगा जाय विपक्ष साक्ष्य देगा?  जिसके पास मकान के कागजात न हो बैंक के खाते न हो बिजली के बिल न हो या अन्य तरह का कोई दस्तावेज पैतृक भी न हो पिता के वंशावली में भाई भी न सिद्ध होता हो तो उसे भारत का निवासी कैसे मान लिया जाए, केवल विपक्ष के कहने पर अजब हाल है, संविधान खतरे में है जनता को बताने वालों का। अब जनता को चालक कहां जाए या मूर्ख समझ में नहीं आता, विपक्ष जो कहे उसके साथ आंदोलन के लिए खड़े हो जाओ यदि नहीं खड़े हो तो देश द्रोही हो। आंदोलन करना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन देश और समाज का हित, उचित अनुचित को देखकर जनता को राजनेताओं के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, लेकिन जनता की चाल राज नेताओं की ढाल बन जाती है। यदि राजनेताओं को चुनाव आयोग के फैसले में गलत नजर आ रहा हैं तो अपने ही आवास और अपने प्रॉपर्टी में बसने का ऑफर तो कम से कम दे देना चाहिए, लेकिन नेता ऐसा नहीं करेंगे वे तो आपको ही शस्त्र बनाकर आपके माथे पर मूंग दलेंगे, इससे बड़ा जनता के मूर्ख बनाने का प्रमाण क्या हो सकता है, जिसकी लाठी उसकी भैंस की कहावत यहां चरितार्थ होती नजर आ रही है। आज चुनाव आयोग की जो नियमावली को खटाई में डाली जा रही है वह देश के लिए गंभीर मामला नहीं गंभीर खतरा भी है। दिल्ली की गद्दी बचाते बचाते कांग्रेस बिहार से चली गई वही हाल आज भाजपा की भी है दिल्ली की गद्दी बचाने में बिहार को भी कही ले न डूबें।

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