तिरंगा फहराते समय सावधानियां बरतें

तिरंगा के दाहिने ना हो खड़े 

रोहतास। स्वतंत्रता दिवस की जश्न में पुरा देश झूम रहा है। जहां हर जगह तिरंगे को सलामी दी जाती है। वहीं संवोधन भी होता है। इस संबंध में कवि सह साहित्यकार सुनील कुमार रोहतास ने बताए कि तिरंगा के दाहिने कोई भी झण्डा नहीं लगाना चाहिए बाईं ओर लगा सकते हैं। वह भी तिरंगा से ऊंचा न हो ।संभव हो तो तिरंगा झंडा लगाने के बाद अपनी 

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वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो और झंडा उसके दाहिनी ओर होना चाहिए। तिरंगे के बगल में अगर किसी भी झंडे को लगाना है तो उसका स्थान तिरंगे के नीचे होना चाहिए। तिरंगा किसी भी प्रकार से जमीन को नहीं छूना चाहिए।ध्वजारोहण करते समय, तिरंगे की गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। तिरंगा फहराते समय, सुनिश्चित करें कि यह फटा या गंदा न हो।ध्वजारोहण और झंडा फहराने में मुख्य अंतर यह है कि ध्वजारोहण में झंडे को नीचे से ऊपर की ओर खींचा जाता है, जबकि झंडा फहराने में झंडा पहले से ही ऊपर बंधा होता है और उसे रस्सी से खोलकर फहराया जाता है। 

ध्वजारोहण 

यह आमतौर पर स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर किया जाता है। 

इस दिन, प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा नीचे से ऊपर की ओर खींचकर फहराते हैं, 

यह प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है कि भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की।

रिपोर्टर

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