दहेज मुक्त शादी संपन्न
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Dec 07, 2025
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रोहतास।बिहार में शादियां अक्सर दो वजहों से चर्चा में आती है। वक्ष कपहली- आर्केस्ट्रा में बजते भोजपुरी गाने और दूसरी- गुपचुप (या खुलेआम) तरीके से लिया गया मोटा दहेज.
लेकिन रोहतास के मुख्यालय सासाराम में एक ऐसी शादी हुई, जिसने इन धारणाओं को धो-पोंछकर एक तरफ रख दिया है।यह कहानी है अवध बिहारी राय की. ओर उम्र में बुजुर्ग, तजुर्बे में पुराने, लेकिन सोच ऐसी कि आज का मॉडर्न युवा भी रश्क कर जाए. उन्होंने अपने पोते की शादी में 'दहेज' शब्द को एंट्री देने से साफ़ मना कर दिया और समाज के सामने एक ऐसी 'मिसाल' पेश की, जिसकी चर्चा अब चट्टी-चौराहों से लेकर सियासी गलियारों तक हो रही है.
ब्रम्हर्षि जनमंच के अध्यक्ष और पुरानी पीढ़ी के संजीदा व्यक्ति अवध बिहारी राय ने तय किया कि उनके घर लक्ष्मी (बहू) आएगी, तो बिना किसी शर्त के. मामला उनके सुपौत्र और समरडीहा पंचायत की मुखिया विभा देवी के बेटे किशन राय की शादी का था. दुल्हन बनीं वाराणसी की काजल सिंह.
जब तिलक और जयमाला का मंच सजा, तो वहां न नोटों की गड्डियों की चमक थी और न ही किसी डिमांड की कसक. थी तो बस बड़ों की दी हुई दुआएं और एक नई, प्रोग्रेसिव सोच।
कहा जाता है कि अच्छी पहल को सबका साथ मिलता है. इस शादी में भी कुछ ऐसा ही हुआ. 'दहेज मुक्त शादी' के गवाह बनने के लिए बिहार से लेकर झारखंड तक के VIP और VVIP सासाराम पहुंच गए. लगा कि जैसे कोई सियासी रैली नहीं, बल्कि 'सामाजिक सुधार' का महाकुंभ लगा हो.
दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने वालों की लिस्ट इतनी भारी-भरकम थी कि मंच भी गर्व से फूल गया होगा:
चतरा (झारखंड) से बीजेपी सांसद कालीचरण सिंह और स्थानीय सासाराम सांसद मनोज कुमार विशेष रूप से पहुंचे. सासाराम विधायक स्नेहलता कुशवाहा, चेनारी विधायक मुरारी गौतम, मोहनियां विधायक संगीता कुमारी और कांटी विधायक ई. अजित कुमार समेत कई माननीय मौजूद रहे.विधान पार्षद जीवन कुमार, भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह बबलू और सीएम के पूर्व आप्त सचिव दिनेश राय ने भी वर-वधु के सिर पर हाथ रखा.
इसके अलावा KTV डायरेक्टर पंकज सिंह डब्लू, पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद, राजेश गुप्ता, बीजेपी नेता शेखर पासवान, जेडीयू के अनिल सिंह, जिला पार्षद छोटन सिंह, और आरएसएस के प्रांत प्रचारक उपेंद्र त्यागी समेत जेल अधीक्षक सुजीत राय और सिविल सर्जन मणिरंजन जी जैसे प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
क्यों ख़ास है यह शादी नज़रिए से देखें तो यह महज एक विवाह समारोह नहीं, बल्कि एक 'स्टेटमेंट' है. बिहार जैसे राज्य में, जहां शादियों में हैसियत का पैमाना 'दहेज की रकम' से तय होता है, वहां एक संपन्न परिवार का 'दहेज मुक्त' विवाह करना एक बड़ा सामाजिक हस्तक्षेप है. अवध बिहारी राय ने साबित किया कि 'मॉडर्न' होने के लिए जींस-टीशर्ट की नहीं, बल्कि 'दकियानूसी सोच' को उतार फेंकने की ज़रूरत होती है.
भैया, सासाराम के इस परिवार ने तो 'गर्दा' उड़ा दिया है. किशन और काजल की यह जोड़ी और अवध बिहारी राय की यह जिद्द, आने वाली पीढ़ियों को बताएगी कि शादी 'सौदा' नहीं, 'संस्कार' है. उम्मीद है कि इस वीआईपी शादी की चमक से बिहार के अन्य घरों में भी 'दहेज मुक्त' उजाला फैलेगा.
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