किसानों का शोषण चरम पर
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Dec 14, 2025
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धान की उपज कम भाव भी नदारथ
रोहतास।खरीफ फसल की अंतिम समय चल रहा है। जहां ऊंची दामों पर किसानों ने महंगे खाद महंगे बीज डालकर खेती को तैयार किया वहीं ऐन मौके पर हुई बरसात ने धान की सारी फसलों को चौपट कर दिया। दिनारा प्रखंड सहित रोहतास जिले के किसानों ने अपने भाग्य का रोना शुरू कर दिया है।इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। इस समय जहां एनडीए प्रचंड बहुमत से जीतकर अपनी खुशी मनाने में लगी है। वहीं कमर तोड मंहगाई में प्राकृतिक आपदा की शिकार हुई धान की फसलों का फूल झड जाने से उपज आधा भी नहीं हो रहा है। दिनारा प्रखंड के महरोड कृषि फार्म में अधिकारियों एवं ऊंचा धिकारियों के निर्देश पर धान की कटाई किया गया। जहां प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने बताया कि मात्र नौ बोरे प्रति बिगहा धान की पैदावार हुई है। जबकि किसानों का और ही बुरा हाल है। एक उपज कम एवं दुसरी धान का भाव अठारह सौ रुपए प्रति क्विंटल किसानों से खरीदना। किसानों की कमर तोड मंहगाई में खाद बीज बुआई का पैसा भी नहीं निकल पा रहा है। ऊपर लडके लडकियों की पढ़ाई लिखाई एवं शादी विवाह जबरदस्त किसानों का आमदनी पर डका डाल रही है सरकार। सरकार का कहना की पैक्स एवं व्यापार मंडल में धान को पहुंचाओ एवं चौबीस सौ रुपए पाओ। जबकि व्यापार मंडल एवं पैक्स अध्यक्ष फर्जी धान खरीदने में व्यस्त हैं। एक दो किसानों का खरीदने भी है तो बहुत परेशान किया जा रहा है।बाहर रहने वाले किसानों का कागजात एवं छोटे छोटे किसानों के नाम पर फर्जी खरीदारी कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। किसानों को कोई सुनने वाला नहीं है। एनडीए सरकार कहती हैं कि हम किसानों की आय दोगुनी करेंगे। लेकिन कैसे अभी तक किसानों को समझ में नहीं आया है। अगर वर्तमान सरकार अपनी जीत की खुशी मना लिया हो तो किसानों के बारे में सोचें।अगर चौबीस सौ रुपए धान बोरा सहित पैक्स एवं व्यापार मंडल में देनी है तो खुली मार्केट में धान के भाव इतना अंतर क्यों है। सरकार को इस पर ध्यान केंद्रित कर किसानों की हित में धान फसल का रेट खुले मार्केट में बढानी चाहिए।कमर तोड मंहगाई में किसानों की बैचैनी देखते बन रही है।धान खरीदी का फर्जी आंकड़े अध्यक्षों द्वारा अधिकारियों के माध्यम से दिलाया जा रहा है।जो काफी चिंताजनक है। किसानों का जबरदस्त शोषण किया जा रहा है।


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