भारतीय संविधान तेरे कितने है रूप--- मोहनियां बाजार के प्रवेश रोड में सभी सब्जी दुकानदारों द्वारा कानून को दिखाया जा रहा है ठेंगा

संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की रिपोर्ट 

दुर्गावती(कैमूर)--- इस देश में बने कानून तेरे कितने रूप और तरीके हैं, कुछ कहना मुश्किल है। समान धाराओं में किसी को बेल तो किसी को जेल मिलता है। किसी के लिए रात को न्यायपालिका खुल जाती है तो किसी के लिए मृत्यु के बाद भी न्याय मिलना मुश्किल है, बाल बच्चे आज औलाद तेरे दरवाजे पर दस्तखत देते फिरते हैं, फिर भी नहीं मिलता है न्याय बदले में मिलती है तारीख। किसी की याचिका कुछ सप्ताहों में मंजूर हो जाती है बहस और फैसला आ जाता है, तो किसी की याचिका मंजूर होने में बरसों लग जाते हैं। फिर भी नहीं आता है नंबर ना ही मिलता है न्याय। किसी भी जांच का रिजल्ट सकारात्मक होता है तो किसी का जांच किसी मुकाम पर ही विराम ले लेता है, और वह आत्महत्या सुसाइड या लावारिस के रूप में बदल जाता है। किसी का अपराध सरकार क्षमा कर देती है तो किसका सिद्ध ही नहीं हो पता है। उसी क्रम में बात करते हैं मोहनियां बीच बाजार से गुजरने वाली सब्जी मंडी की सरकार के द्वारा बार-बार हटाए जाने के बाद दुकानदार नई सब्जी मंडी में नहीं जाते हैं आखिर क्यों। क्या कानूनी ही कमजोर है या सरकार या सरकार के कानून पालन करने वाले पदाधिकारी, इससे क्या समझा जाए इसे तय करेगी सरकार या राजनेता या वोट की राजनीति। प्रशासन के द्वारा बार-बार हटाना और दुकान दारो के द्वारा बार-बार अपनी दुकान बाजार में प्रवेश करने वाली रोड में लगाना आखिरकार क्या दर्शाता है। एक तरफ कहा जाता है कि संविधान सर्वोपरि है, संविधान के कानून को हम लोग मानेंगे और जनता भी मानेंगी, तो आखिरकार फिर यह अतिक्रमण क्यों नहीं हट रहा है। इसीलिए तो जनता यह समझ नहीं पाती की साधारण लोगों के लिए कानून क्या है और अलग अलग रसूखदारों के लिए और रजानेताओं के लिए कानून क्या है, इस पर आम जनता चर्चा करती है कि हमारे भारतीय संविधान तेरे कानून रूप हैं, उसका पालन कराने में तुझे प्रशासन सुरक्षा बल भी तेरे पास है ,सब कुछ है तो फिर तुझे क्या चाहिए कुछ समझ में नहीं आता। भारतीय संविधान को चुनौती राजनेता देते हैं। या जनता या शासन करता या शासन चलाने वाले लोग विचारणीय विषय है।

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