वीर कुंवर सिंह चौक डेहरी में धूमधाम से उनकी जयंती मनाया गया


संवाददाता पारस नाथ दुबे


 डेहरी रोहतास।बाबू वीर कुंवर सिंह की 168 वीं विजयोत्सव गुरुवार को शहर के वीर कुंवर सिंह चौक पर मनाई गई। अंग्रेजों को पराजित कर उन्होंने देश ही नहीं दुनिया में यह एहसास दिलाया कि अदम्य साहस व शक्ति के बल पर किसी उम्र में जंग जीती जा सकती है। वर्तमान समय में युवाओं को उनके साहस, पराक्रम व वीरता से प्रेरणा लेनी चाहिए। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ कुंवर सिंह को 23 अप्रैल 1857 को विजय प्राप्त हुई थी। इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। अपनी उम्र के 80 वर्ष के पड़ाव पर जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुंवर सिंह ने छोटे भाई अमर सिंह के साथ 12 जून 1857 को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। अंग्रेज अधिकारी विंसेंट आयर एवं विलियम टेलर को संयुक्त रूप से विद्रोह दबाने की जिम्मेवारी मिली लेकिन बाबू कुंअर सिंह और अमर सिंह अंत तक छापामार तरीके से युद्ध को लड़ते रहे। कहते हैं जब आसमान से बादल बरस रहे थे और बिजली कड़क रही थी तो भोजपुर की मिट्टी में बाबू कुंअर सिंह के तलवार की खनखनाहट अंग्रेजों को लहूल करते हुए विजय प्राप्त करती रही। आजादी के दीवाने बाबू कुंअर सिंह के विद्रोह से उपजी लपटें संपूर्ण शाहाबाद को विद्रोही बना दी थी।

बंगाल के बैरकपुर छावनी में मंगल पांडेय के नेतृत्व में सिपाही विद्रोह के बाद 8 अप्रैल 1857 को ही उन्हें फांसी दे दी गई थी। लेकिन विशाल सोन नदी का दोनों किनारा धधक उठा था जिसे बाबू वीर कुंअर सिंह ने नई उर्जा दे दी थी। युद्ध के दौरान जख्मी हुए अपने बाजू को गंगा की भेंट कर देने के उपरांत बाबू कुंअर सिंह की 26 अप्रैल 1858 को शहादत हुई।

इस मौके पर कुंअर राणा सामाजिक कल्याण संस्था के राजन राज, राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष सिमल सिंह, युवा अध्यक्ष अंबुज सिंह, राष्ट्रीय सवर्ण कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी, अश्विनी सिंह, विशाल सिंह, पंकज सिंह, दिलीप सिंह,आनंद सिंह,विमल सिंह, लल्लू चौधरी, सुशांत सिंह, वरुण राजपूत, अरुण सिंह, राजीव सिंह, डिंपल सिंह, रजनीश कुमार सिंह, प्रशांत सिंह,शुभम सिंह, सोनू सिकरीवाल, मुन्ना सिंह, अभिषेक सिंह, कर्मवीर सिंह,अमर सिन्हा, अर्जुन केसरी आदि शामिल थे।

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