राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन


संवाददाता पारसनाथ दुबे


 डिहरी आनसोन रोहतास। राष्ट्रीय लोक अदालत कार्यक्रम का उद्घाटन अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी रजतदीप, न्यायिक दंडाधिकारी प्रवीण कुमार तथा अन्य न्यायिक दंडाधिकारियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।

लोक अदालत में कुल 357 सुलहनीय वाद रखे गए थे। इनमें बैंकिंग से जुड़े 290 मामलों में से 111 मामलों का निष्पादन किया गया। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 68 लाख 75 हजार 371 रुपये का सेटलमेंट हुआ, जिसमें से 44 लाख 42 हजार 600 रुपये की राशि की वसूली भी की गई। इसके अलावा 67 आपराधिक मामलों का भी निष्पादन किया गया, जिनमें अर्थदंड भी प्राप्त हुआ।

लोक अदालत के सफल संचालन के लिए चार बेंचों का गठन किया गया था। पहली बेंच में अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी रजतदीप के साथ सदस्य अधिवक्ता रितेश कुमार, दूसरी बेंच में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी प्रवीण कुमार के साथ सदस्य अधिवक्ता ओमप्रकाश पांडेय, तीसरी बेंच में न्यायिक दंडाधिकारी ऋचा कश्यप के साथ सदस्य अधिवक्ता राणा संदीप सिंह तथा चौथी बेंच में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अर्चना कुमारी के साथ सदस्य अधिवक्ता अमरनाथ सिंह ने मामलों का निष्पादन कराया।

इस दौरान छोटे-छोटे सम्मनीय एवं सुलहनीय वादों का भी निपटारा किया गया। अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी ने लोक अदालत की महत्ता बताते हुए कहा कि यह विवादों के निपटारे की एक प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था है, जिससे लोगों को त्वरित न्याय मिलता है और न्यायिक प्रक्रिया में अधिवक्ता शुल्क की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि वन, विद्युत विभाग, बैंकिंग मामलों सहित ग्रामीण और गरीबों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का भी इसमें निपटारा किया जाता है। लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते के आधार पर मामलों को समाप्त कराया जाता है।

लोक अदालत के दौरान न्यायालय परिसर में विवादों के निपटारे को लेकर दोनों पक्षों के लोगों की भीड़ लगी रही। इस मौके पर अनुमंडल विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष मनोज अज्ञानी सहित बैंकिंग विभाग, माप-तौल विभाग समेत कई विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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