बिना एनओसी, सीमा से आधा किमी पहले ठोक दिया 8 लाख का तोरण द्वार
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- May 21, 2026
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रोहतास। सूचना के अधिकार ने डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद की दोहरी लापरवाही और जनता के पैसे की खुली बर्बादी को बेनकाब कर दिया है। आरटीआई से खुलासा हुआ कि डेहरी- नासरीगंज पथ पर मकराईन में करीब 8 लाख 20 हजार की लागत से बना भव्य वेलकम बोर्ड नगर की वास्तविक सीमा से आधा किलोमीटर पहले लगा दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह कि पथ निर्माण विभाग की जमीन पर बने इस बोर्ड के लिए विभाग से एनओसी तक नहीं ली गई। दो साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जिला पदाधिकारी रोहतास ने 2 मई 2026 को सख्त आदेश जारी किया कि नगर परिषद गलत जगह लगे बोर्ड को तत्काल वास्तविक सीमा पर शिफ्ट करे। अनुमंडल पदाधिकारी डेहरी को पूरे काम की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश में 32 लाख 73 हजार 715 रुपये की लागत से लगे चार बोर्डों पर हुए खर्च और बिना एनओसी निर्माण के दोषी अधिकारियों पर जांच या कार्रवाई का एक शब्द भी नहीं है।
*ऐसे शुरू हुई आरटीआई की जंग*
रोहतास।न्यू एरिया, डालमियानगर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रविकेश उपाध्याय ने दो साल पहले नगर परिषद से आरटीआई में सीधा सवाल पूछा था- मकराईन का वेलकम बोर्ड नगर सीमा पर है या नहीं? नगर परिषद ने अपने जवाब में खुद कबूल किया कि बोर्ड सीमा से आधा किमी पहले है और इसके लिए पथ निर्माण विभाग से कोई एनओसी नहीं ली गई थी। दस्तावेजों के मुताबिक एक बोर्ड पर करीब 8 लाख 20 हजार और शहर के चार एंट्री प्वाइंट पर लगे कुल चार बोर्डों पर 32,73,715 रुपये खर्च किए गए। आरटीआई जवाब मिलने के बाद रविकेश ने अनुमंडल लोक शिकायत निवारण में परिवाद दायर किया कि गलत जगह बोर्ड लगने से आम जनता भ्रमित हो रही है। क्योंकि किसी क्षेत्र की सीमा का बहुत महत्व होता है। इस पर नगर परिषद का हैरान करने वाला जवाब था- "वेलकम बोर्ड से सीमा तय नहीं होती"। इसी आधार पर परिवाद को बंद कर दिया गया।
*अपर समाहर्ता से लेकर डीएम तक पहुंचा मामला*
परिवाद बंद होने के बाद रविकेश ने प्रथम अपील अपर समाहर्ता के समक्ष दायर की। उन्होंने दलील दी- "जब बोर्ड से सीमा तय नहीं होती तो फिर बिना एनओसी के 8 लाख से ज्यादा रुपये क्यों फूंक दिए गए? यह सरासर सरकारी पैसे की बर्बादी है। आखिर इस वेलकम बोर्ड पर इतने रुपये खर्च करने का मुख्य उद्देश्य क्या था?"
प्रथम अपीलीय प्राधिकार ने अपीलकर्ता के तर्क को सही माना और कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद डेहरी को निर्देश दिया कि विभाग से निर्देश लेते हुए बोर्ड को सीमा पर लगाने की उचित कार्रवाई करें।
आदेश में स्पष्ट कार्रवाई का जिक्र न होने पर रविकेश ने जिला पदाधिकारी के यहां द्वितीय अपील दायर की। 02.05.2026 को पारित आदेश में डीएम ने स्पष्ट रूप से माना कि बोर्ड गलत जगह है। उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी को बोर्ड सीमांकित क्षेत्र के पास लगाने और अनुमंडल पदाधिकारी डेहरी को अनुश्रवण का आदेश दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता रविकेश उपाध्याय ने कहा, "बोर्ड शिफ्ट होगा, यह मेरी दो साल की मेहनत की जीत है। लेकिन असली सवाल अब भी बाकी है। बिना एनओसी और गलत जगह 8 लाख से ज्यादा खर्च करने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? जनता के j के जवाब नहीं मिले हैं: पथ निर्माण विभाग की बिना एनओसी के सड़क किनारे निर्माण की अनुमति किसने दी?
नगर की सीमा से आधा किमी पहले बोर्ड लगाने के लिए गलत स्थल का चयन किस अधिकारी ने किया? गलत सीमांकन पर 8 लाख से अधिक के खर्च की भरपाई कौन करेगा?
इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर विभागीय कार्रवाई कब होगी?
फिलहाल पूरे शहर की नजर नगर परिषद पर टिकी है कि डीएम के सख्त आदेश पर कब तक अमल होता है। अनुमंडल पदाधिकारी डेहरी को बोर्ड शिफ्टिंग कार्य के निस्तारण में अपने स्तर से अनुश्रवण करने का भी आदेश जिला पदाधिकारी द्वारा दिया गया है। अब देखना है कि सिर्फ बोर्ड खिसकता है या दोषियों पर कार्रवाई भी होती है।


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