पराली की आग बनी कहर, गरीब का घर जलकर राख खाने-पीने से लेकर कपड़े तक सब कुछ हुआ खाक
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 22, 2026
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सरकारी रोक के बावजूद पराली जलाने का सिलसिला जारी, प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार के लिए राहत और मुआवजे की मांग उठाई
ब्यूरोचीफ संदिप कुमार के साथ रुपेश दुबे की रिपोर्ट
कैमूर:-- जिले के करमचट थाना क्षेत्र अंतर्गत थीलोई गांव में पराली जलाने की लापरवाही एक बार फिर भारी पड़ गई, जब खेत में लगाई गई आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और एक गरीब असहाय परिवार का आशियाना उजाड़ दिया इस दर्दनाक घटना मे झोपड़ी नुमा मकान पूरी तरह जलकर राख हो गया, जिससे पीड़ित दालगजन मुसहर
स्व बनवारी मुसहर के परिवार बेघर हो गया प्राप्त जानकारी के अनुसार, खेत में पराली जलाने के दौरान अचानक आग तेज हवा के कारण फैल गई और पास स्थित एक गरीब परिवार की झोपड़ी तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने पूरी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयावह थी कि परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला और घर में रखा सारा सामान जलकर नष्ट हो गया। इस घटना में पीड़ित परिवार के पास न तो खाने-पीने का सामान बचा है और न ही पहनने के लिए कपड़े। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पराली जलाने पर सख्ती से रोक लगाई जाती, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। गौरतलब है कि सरकार द्वारा पराली जलाने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया गया है और इसके उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में खुलेआम पराली जलाई जा रही है, जो न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि इस तरह की घटनाओं को भी जन्म दे रही है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठाई गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कितनी जल्दी राहत मिल पाती है।


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