भोजपुरी भाषा-संस्कृति के संरक्षण का संकल्प, भलुनीधाम में 46वाँ साहित्यिक अधिवेशन कवि सम्मेलन संपन्न


श्री यक्षिणी भोजपुरी साहित्य समिति के वार्षिक अधिवेशन एवं कवि सम्मेलन में व्यापक जनभागीदारी; संस्थापक कन्हैयालाल पंडित को भावभीनी श्रद्धांजलि



रोहतास। भोजपुरी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित श्री यक्षिणी भोजपुरी साहित्य समिति, भलुनीधाम का 46वाँ वार्षिक अधिवेशन एवं अखिल भारतीय भोजपुरी कवि सम्मेलन रविवार को व्यापक जनभागीदारी और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। 


महान समाजसेवी, संस्कृतिपुरुष एवं पर्यावरण संरक्षक स्वर्गीय कन्हैयालाल पंडित द्वारा वर्ष 1981 में स्थापित इस संस्था के वार्षिक आयोजन में साहित्यकारों, कवियों, जनप्रतिनिधियों, संस्कृतिकर्मियों और स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


माँ यक्षिणी भवानी के पावन धाम में आयोजित कार्यक्रम का आरंभ समिति के संस्थापक कन्हैयालाल पंडित के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। 


 समिति के सचिव अधिवक्ता हर्षनाथ पांडेय ने अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत किया, और वार्षिक अधिवेशन में समिति के प्रमुख माँगों और 46 वर्ष की यात्रा को उल्लेखित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सर्वदेव ओझा ने की।


समिति की भोजपुरी पत्रिका "माई के बोली" के कन्हैयालाल पंडित स्मृति विशेषांक अंक का लोकार्पण किया गया।


उपस्थित जनसमुदाय ने भोजपुरी साहित्य, लोकसंस्कृति, सामाजिक जागरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान का स्मरण किया।


अधिवेशन को संबोधित करते हुए बक्सर लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुधाकर सिंह ने भलुनीधाम के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।


विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार पांडेय, स्थानीय विधायक आलोक कुमार सिंह तथा काराकाट के पूर्व विधायक राजेश्वर राज ने भी अपने विचार रखे।


विधायक आलोक कुमार सिंह ने धाम के विकास की दिशा में किए गए कार्यों और उपलब्धियों का उल्लेख किया। 


वक्ताओं ने समिति की 46 वर्षों की साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्रा की सराहना करते हुए भोजपुरी की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।



भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता देने की मांग


अधिवेशन में भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही भलुनीधाम के चारों ऐतिहासिक पोखरों के जीर्णोद्धार, सार्वजनिक पुस्तकालय की घेराबंदी तथा भलुनीधाम के चैत मेला को पुनर्जीवित करने की मांग भी सरकार और जनप्रतिनिधियों के समक्ष समिति के सचिव हर्षनाथ द्वारा रखी गई तथा मांग पत्र प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भलुनीधाम की धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।



कवि सम्मेलन में गूँजी भोजपुरी की मिठास


अधिवेशन के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सरस्वती वंदना अजीत ओझा ने प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन में डा० गुरुचरण सिंह, अनुराधा कृष्ण रस्तोगी, सुदर्शन सिंह, सुनील कुमार,कविराज विकास सावर्णी, शैलेन्द्र कुमार, मुन्ना प्रसाद मुरली, सरोज कुमार पंकज, रामकुमार मिश्र, पांडेय अकेला, ब्रजेश सिंह,

दयाशंकर मिश्र, लोकनाथ त्रिपाठी 'अनगढ़', राजबल्लभ सिंह 'भोजपुरिया',कुमार शुभम, धनेश्वर प्रसाद, रामदुलार सत्मार्गी, नीजू राम (सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग विभाग, जिला- रोहतास), ओम प्रकाश मिश्र, प्रो. राज बहादुर राय, प्रो. सुरेन्द्र सिंह, बिजेन्द्र दूबे, अशोक प्रसाद गुप्ता, जामींदार सिंह, लक्ष्मण चौबे, श्रीनिवास चौबे, ब्रजेश निराला, मोहन व्यास सहित अनेक कवियों ने काव्यपाठ किया। भक्ति, श्रृंगार, वीर, हास्य और ग़ज़ल,कह मुकरी की विविध प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। 

भोजपुरी की लोकसंवेदना, सामाजिक सरोकार, मानवीय रिश्तों और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी रचनाओं का श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया।

 कवि सम्मेलन का मंच संचालन युवा रचनाकार कुमार अमरनाथ ने किया।


समारोह में उपस्थित साहित्यप्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भोजपुरी भाषा-साहित्य के संरक्षण के लिए समिति की निरंतर सक्रियता की सराहना की। वर्ष 1981 से चली आ रही इस साहित्यिक परंपरा का 46वाँ अधिवेशन भोजपुरी की जीवंत लोकचेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और सामूहिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बना।

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