
अपनी जिम्मेवारी व अपनी भागीदारी को समझे
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, ब्यूरो चीफ कैमूर
- Aug 05, 2025
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संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की लेखनी से
दुर्गावती(कैमूर)-- आज का समय लोकतंत्र का है राजतंत्र का नहीं ऐसी स्थिति में जनता को अपनी जिम्मेदारी और अपनी भागीदारी को लोकतंत्र में बखूबी समझने की जरूरत है। राजनेता अपने को लोकतंत्र का प्रहरी न समझ कर राजतंत्र की स्टाइल में अपनी जिंदगी जी रहे हैं और राजनीतिक खेती वैसे ही कर रहे हैं जैसे मुगल और अंग्रेज बीते कालों में किया करते थे। आज किस तरह की आजादी है और कैसे लोकतंत्र का शासन चल रहा है आप के देश में आप सब देश के नागरिक समझ सकते हैं। पूर्व काल से ज्यादा साक्षरता दर बढ़ी है लेकिन पूर्व काल से ज्यादा व्यक्ति की शिक्षा में सदाचार, सादगी, समाज के प्रति उत्तरदायित्व, देश के प्रति श्रद्धा, का जो दर है घटा है। क्योंकि आध्यात्मिक जीवन जीने की जो परंपरा की कला हमारे पूर्वजों की जो थी उसमें कमी आई है उसे राजनेता और गिराने पर तुले हुए हैं। एक तरफ विश्व युद्ध की आग में जल रहा है तो दूसरी तरफ भारत के बढ़ते कद से विश्व के राजनेता घबराए हुए हैं और भरत को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। एक तरफ देश में आतंकवाद के समर्थक, घुसपैठियों समर्थक, अलगाववाद के समर्थक भी राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर लोकतंत्र की सीढ़ी पर चढ़ कर कुर्सी पाना चाहते हैं और प्रयास में भी है। तो दूसरी तरफ जातिवादी और वंशवाद का बीज डालकर उसकी खेती करके सीढ़ियों के पर चढ़ने के फिराक में है, ऐसी स्थिति में देश के नागरिकों की जिम्मेवारियां बढ़ जाती हैं। जब-जब देश में स्वार्थ बाद ने अपना स्थान बनाया है तब तब देश की जनता जागरुक होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए जवाब दिया और सत्ता में परिवर्तन करती रही। आज एक बार फिर समय बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर जनता के सामने उपस्थित हुआ है अब जनता की जिम्मेवारियां बढ़ जाती है कि हम किसी चुने, क्या आतंकवाद, जातिवाद नफरत बाद, देश के अंदर घुसपैठी यो का साथ देने वाले, देश के अंदर आतंकवाद का साथ देने वाले, या अपनी विरासत खड़ा करने वाले, लोगों में से किसे चुनना है। राजनीतिक गलियारों से निकलकर गांव की गलियों शहर के सभा स्थल तक चिकनी चुपड़ी बातें लेकर लोग आपके पास आ रहे हैं और आएंगे ऐसे में सावधानी तो आप ही को बरतनी होगी न और अपना मत देकर लोगों को जवाब भी देना होगा। यदि आप अपने सूझबूझ का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो फिर यह अमूल्य समय आपके हाथों से निकल जाएगा और आप राजनेताओं और सरकार को कोशन के सिवा कुछ नहीं कर सकते है।
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