सीपीआर पर जागरूकता अभियान आमजनों तक पहुंचे तकनीक तो बच सकती है कई जानें जीवन बचाने हेतु दिलाई शपथ

राजगढ़। जिले में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन पर 17 अक्टूंबर तक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के पहले दिन जिला अस्पताल में  प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित आमजनों सहित मेडिकल स्टाॅफ को इस तकनीक के बारे में विस्तार से बताया पर प्रैक्टिकली समझाया गया। साथ ही सभी लोगों को जीवन बचाने की शपथ भी दिलाई गई। 

मुख्य चिकित्सा एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. शोभा पटेल ने बताया कि सीपीआर पर प्रशिक्षण अभियान पूरे एक सप्ताह तक चलेगा। विशेषज्ञों ने अचानक कार्डियक अरेस्ट, दिल की धड़कन रूकने जैसी आपातकालीन स्थितियों में तुरंत और प्रभारी ढंग से कार्यवाही करने के लिए हाथों से सीपीआर देने की विधि को बहुत कारगर माना है। इस पद्धति से एक घंटे के अंदर किसी की भी जान बचाई जा सकती है।

सीएमएचओ ने कहा कि यह पहल केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। समाज में इस जीवन रक्षक कौशल के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक लोग सीपीआर तकनीक सीख सकें और किसी भी आपात स्थिति में पहले जान बचाने वाले व्यक्ति बनें। जिला अस्पताल में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान डाॅ. आर.के. कठेरिया, डाॅ. सुधीर कलावत, आरएमओ डाॅ. अमित कोहली सहित अस्पताल स्टाॅफ और आमजन मौजूद थे। 

सीपीआर का महत्व

इस अभियान का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को पता हो कि सीपीआर क्या है और इसे कैसे दिया जाता है, क्योंकि समय पर दिया गया सीपीआर किसी की भी जान बचा सकता है। जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और वह सांस नहीं ले पाता है तब यह तकनीक काम आती है। सीपीआर मुख्य रूप से दो प्रकार से दिया जाता है। पहला छाती को जोर से और तेजी से दबाना, जिससे दिल को कृत्रिम रूप से पंप किया जाता है, इससे रक्त संचार बना रहता है। दूसरा मुहं से मुहं में हवा भरकर फेफड़ों तक आक्सीजन पहुंचाने का काम किया जाता है, ताकि मरीज की सांस लेने की प्रक्रिया शुरू हो सके। इन दोनों तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेने के बाद ही करना चाहिए।

रिपोर्टर

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