शराबबंदी, हथियारबंदी के दावों के बीच मोहनिया में कट्टा लहराकर CSP सेंटर में तांडव 24 घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ

रिपोर्ट संदिप कुमार

कैमूर:--- बिहार में शराबबंदी और हथियारबंदी के सरकारी दावों के बीच कैमूर जिले के मोहनियां थाना क्षेत्र से कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई है। मोहनिया थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 4 डड़वा स्थित एक CSP सेंटर में गुरुवार शाम 6-7 की संख्या में पहुंचे बदमाशों ने खुलेआम हथियार के बल पर जमकर उत्पात मचाया, तोड़फोड़ की और लाखों रुपये के सामान को बर्बाद कर दिया। हैरानी की बात यह है कि घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पीड़ित ब्रजेन्द्र कुमार, पिता जयप्रकाश सिंह, निवासी वार्ड नंबर 4 डड़वा द्वारा मोहनिया थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, गुरुवार 11 जून 2026 को शाम करीब 4:30 बजे वह अपने CSP सेंटर पर मौजूद थे। तभी 6-7 की संख्या में हथियारबंद युवक दुकान में घुस आए और जान से मारने की धमकी देते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। आवेदन के मुताबिक आरोपियों में शामिल एक युवक ने अपना नाम संजीव कुमार बताते हुए कहा कि वह दया सिंह का बेटा है और धमकी दी कि “कोई भी इस घटना की जानकारी किसी को नहीं देगा और ना ही CCTV फुटेज बाहर जाएगा, नहीं तो जान से मार देंगे।”


पीड़ित का आरोप है कि अपराधी शराब के नशे में थे और उनके हाथ में सिक्सर कट्टा था। उन्होंने फायरिंग करने की भी कोशिश की लेकिन गोली नहीं चली। जब आसपास के लोग जुटने लगे तो सभी आरोपी रामगढ़ रोड की तरफ भाग निकले। घटना में CSP सेंटर के कंप्यूटर, मशीन समेत अन्य सामान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे पीड़ित को लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। पूरी वारदात CCTV कैमरे में कैद बताई जा रही है और पीड़ित ने पुलिस को इसकी जानकारी भी दे दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद अपराधी शराब के नशे में खुलेआम हथियार लेकर घूम रहे हैं। हथियारबंदी के दावों के बीच अपराधी कट्टा लहराते हुए पुलिस को चुनौती दे रहे हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि घटना के इतने घंटे बीत जाने के बाद भी मोहनिया पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ा कैसे? क्या मोहनिया में कानून का खौफ खत्म हो चुका है? और पुलिस कार्रवाई अब तक क्यों नहीं?

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट