भिवंडी के पड़घा में डॉग बाइट से 5 वर्षीय मासूम की मौत
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 11, 2025
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सरकारी अस्पतालों पर लापरवाही के आरोप; ग्रामीणों में आक्रोश
भिवंडी। तालुका के पड़घा, बोरीवली गांव में आवारा कुत्ते के काटने के बाद 5 वर्षीय राहिल रियाज़ शेख की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर लापरवाही, वैक्सीन की कमी और इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। शनिवार को बच्चे को गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक करने के बाद नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने पड़घा सरकारी अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
घटना 20 नवंबर की शाम की है। आवारा कुत्ते ने राहिल को काट लिया, जिसके बाद उसे पड़घा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि यहां एंटी-रेबीज़ वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थी। अस्पताल ने दो इंजेक्शन देकर बच्चे को भिवंडी के इंदिरा गांधी मेमोरियल अस्पताल रेफर कर दिया, जहां दो और इंजेक्शन दिए गए। पांचवें इंजेक्शन की उपलब्धता न होने के कारण परिवार उसे अलग-अलग अस्पतालों में लेकर भटकता रहा, लेकिन कहीं भी वैक्सीन नहीं मिली। इसी बीच बच्चे की हालत बिगड़ती गई और हालत गंभीर होने पर उसे ठाणे सिविल हॉस्पिटल फिर कस्तूरबा हॉस्पिटल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।परिजन रियाज़ शेख ने कहा कि अगर समय पर इंजेक्शन और उचित इलाज उपलब्ध होता, तो उनका बच्चा बच सकता था। गांववालों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में 20 से 30 बच्चे कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं। आरोप है कि बाहरी क्षेत्रों से कुत्तों को पकड़कर पड़घा में छोड़ दिया जाता है, जिससे यहां हमले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि सरकारी अस्पताल में न तो वैक्सीन मिलती है, न डॉक्टर समय पर उपलब्ध होते हैं और कई बार एम्बुलेंस भी नहीं मिलती।पड़घा सरकारी अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रदीप अशोक पाटिल ने बताया कि राहिल को 20 नवंबर को ग्रेड-3 डॉग बाइट के साथ लाया गया था और ऐसे मामलों में रेबीज़ इम्यूनोग्लोबुलिन देना जरूरी होता है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध नहीं होता। इसलिए बच्चे को भिवंडी रेफर किया गया था। डॉक्टरों के अनुसार बाद के इंजेक्शन भी दिए गए थे, लेकिन 9 दिसंबर को जब वह फिर अस्पताल लाया गया, तब रेबीज़ के गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे थे। ग्राम पंचायत के पूर्व उपसरपंच नासिर रफीक शेख, बच्चे के चाचा अरबाज़ शेख और स्थानीय युवक वक़ास नाचन ने आरोप लगाया कि अस्पतालों में वैक्सीन नहीं होने से परिजन लगातार भटकते रहे, और इसी लापरवाही के कारण बच्चे की जान गई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर होती और वैक्सीन समय पर उपलब्ध होती, तो राहिल की जान बचाई जा सकती थी।घटना के बाद गांव में शोक और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों पर रोक लगाने, रेबीज़ वैक्सीन की निश्चित उपलब्धता, डॉक्टरों की नियमित तैनाती और एम्बुलेंस सुविधा सुचारू करने की मांग की है।


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