ठंड से किसान परेशान तो दुधारी पशुओं के दूध घटे, यात्रा करने वाले यात्री भी परेशान

संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की रिपोर्ट

दुर्गावती(कैमूर)-- सर्दीयो का सितम जारी है कड़ाके की ठंड से पशु पक्षी ही नहीं आम जनजीवन के साथ-साथ किसान भी बहुत परेशान है। कहीं किसानो की फसल बारिश में भीग जाने के कारण नमी के कारण नहीं कट रही हैं तो कही नमी के कारण गेहूं की बुवाई नहीं हो पा रही है। दूध देने वाली दुधारू पशु उचित मात्रा में दूध नहीं दे रही हैं और फलदार सब्जियां ठंड के कारण सिकुड़ रही है। खेतों और खलिहानों में धान की फसल इकट्ठा किए हुए किसान रात में खुले आसमान में देखभाल कर रहे हैं लेकिन धान की खरीदारी सुस्त गति से होने के कारण परेशान है। हर पैक्स के पैक्स अध्यक्ष अपने चहेतो का धान खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं तो जो किसान उनको वोट नहीं किए हैं वह उसका शिकार हो रहे है। पैक्स अध्यक्ष

धान भी खरीद रहे हैं तो₹2100 क्विंटल वह भी डेढ़ किलो अतिरिक्त और 1 किलो बोडो वजन का खर्चा काटकर कर रहे हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष सरकार के द्वारा जलाने वाले अलाव कहीं सार्वजनिक जगहों पर जलती नहीं दिखाई दे रही हैं। छोटे बच्चे और बूढ़ो पर इसका व्यापक असर दिखाई दे रहा है जिसके कारण अक्सर दूध मुंहे बच्चे निमोनिया का शिकार हो रहे है और बूढ़े अपनी अंतिम यात्रा कर जाते हैं। जो किसान अपनी गेहूं की बुवाई कर चुके हैं वह कड़कडाते ठंड में पटवन करने में परेशान है। बस यात्री रेलयात्री समय पर साधन नहीं मिलने के कारण खुले रोड पर यात्रा करने के लिए इंतजार करते देखे जा रहे हैं। अब देखना यह है कि यह ठंड का सितम कब तक चलता है और अपने-अपने व्यवस्था के मुताबिक कैसे इसका सामना आम नागरिक करते हैं कुछ कहना मुश्किल है।

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