शहीदों के आदर्शों पर चलने का संकल्प
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Mar 23, 2026
- 2 views
संवाददाता पारस नाथ दुबे
डेहरी रोहतास ।श्री श्री रामकृष्ण आश्रम, डेहरी में बंदी अधिकार आंदोलन के बैनर तले शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव के शहादत दिवस पर एक विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्चना गुप्ता ने की।
कार्यक्रम के संयोजक संतोष उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि मात्र 23 वर्ष की आयु में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन महान क्रांतिकारियों का जीवन आज भी संघर्ष, साहस और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह द्वारा अन्याय, शोषण और असमानता के विरुद्ध रखी गई वैचारिक क्रांति आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रही है।
मुख्य वक्ता के रूप में इरफान अहमद फातमी, सुरेंद्र तिवारी, नागेंद्र यादव, संजय पासवान, विनोद कुमार, जितेंद्र कुमार, यश उपाध्याय, संतोष सिंह, चंद्रिका राम एवं अधिवक्ता उमाशंकर पांडे उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में अपनाने पर जोर दिया।
वक्ताओं ने विशेष रूप से स्थानीय जेलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रोहतास सहित बिहार की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों को समय पर न्याय, पर्याप्त कानूनी सहायता और मानवीय जीवन-स्थितियाँ नहीं मिल पा रही हैं। वर्षों तक ट्रायल के इंतजार में बंदियों का जेल में रहना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जेलों में भीड़भाड़, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कानूनी सहायता का अभाव बंदी अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि बंदी अधिकार केवल कानूनी नहीं, बल्कि एक मूल मानवाधिकार का प्रश्न है। जब तक समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक स्वतंत्रता अधूरी रहेगी।
इसके साथ ही बाल अधिकारों पर भी वक्ताओं ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और पोषणयुक्त वातावरण देना समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। विशेष रूप से जेलों में बंद महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों की स्थिति, उनके पोषण, शिक्षा और मानसिक विकास पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में शहर में एक सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना एवं भगत सिंह की प्रतिमा लगाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का केंद्र बनेगा, वहीं प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और सामाजिक चेतना के लिए प्रेरित करेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बंदी अधिकार, बाल अधिकार एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर निरंतर आवाज उठाने का संकल्प लिया तथा पुस्तकालय और प्रतिमा स्थापना के प्रस्ताव को साकार करने के लिए संगठित प्रयास करने की बात कही।
अंत में सभी ने शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर जितेंद्र गुप्ता, प्रिंस कुमार, अरुण कुमार उपाध्याय, अजय कुमार मुखिया, नागेंद्र यादव, संतोष सिंह, प्रदीप कुमार दास, अशोक कुमार मौर्य, अभिषेक बॉस, बिनोद कुमार, नवाब अख्तर अंसारी, बिरेंद्र गुप्ता सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।


रिपोर्टर