पैरबी नारायण स्कूल आफ ला द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Apr 15, 2026
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संवाददाता पारस नाथ दुबे।
डेहरी रोहतास ।लॉ द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत आज विधिक स्वयंसेवकों का एक शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण बाल कल्याण समिति, सासाराम के कार्यालय में कराया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने बाल संरक्षण तंत्र को नजदीक से समझा तथा बाल कल्याण समिति (CWC) की कार्यप्रणाली, अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान बाल कल्याण समिति के सदस्य ददन जी पाण्डेय एवं सदस्य गायत्री कुमारी ने उपस्थित विधिक स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए बाल संरक्षण के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त बच्चों (CNCP) के संरक्षण, पुनर्वास और उनके सर्वोत्तम हित में निर्णय लेना होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समिति के समक्ष आने वाले मामलों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और हर निर्णय “बेस्ट इंटरेस्ट ऑफ द चाइल्ड” के सिद्धांत पर आधारित होता है।
ददन जी पाण्डेय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समिति के पास विभिन्न प्रकार के मामले आते हैं, जैसे—परित्यक्त बच्चे, बाल श्रम के शिकार बच्चे, बाल विवाह, यौन शोषण के पीड़ित, तथा ऐसे बच्चे जिनके अभिभावक उनकी देखभाल करने में असमर्थ होते हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी मामलों में समिति का कार्य केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों के समुचित पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
सदस्य गायत्री कुमारी ने विधिक स्वयंसेवकों को बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि जब कोई बच्चा संकट की स्थिति में पाया जाता है, तो उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जहां उसकी सामाजिक जांच रिपोर्ट (SIR) तैयार की जाती है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर ही प्रभावी रूप से बाल संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने स्वयंसेवकों को यह भी समझाया कि संवेदनशीलता, गोपनीयता और धैर्य इस क्षेत्र में काम करने के सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। बच्चों के साथ बातचीत करते समय उनकी मानसिक स्थिति को समझना और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर पैरवी के dinbandhu tats के नेतृत्व में आए विधिक स्वयंसेवकों ने भी अपने प्रश्न रखे, जिनका समाधान सदस्यों द्वारा व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से किया गया। इससे स्वयंसेवकों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त हुआ, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य करने की समझ भी विकसित हुई।
कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों ने इस भ्रमण को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रत्यक्ष अनुभव से उन्हें बाल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला है।
इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य यही था कि विधिक स्वयंसेवक केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए समाज के कमजोर और वंचित बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य करें। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाएंगे और जरूरतमंद बच्चों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


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