विकलांग पर्वतारोही अराधना शिक्षिका भोजपुर टापर बनी


अनिल कुमार सिंह 


ब्यूरो चीफ भोजपुर। जिले के पिरो ब्लाक क्षेत्र के जितौरा पंचायत के बसावन राय टोला निवासी अयोध्या प्रसाद(पूर्व सैनिक)की पुत्री आरधना कुमारी पर्वतारोहण में बिहार टापर बन चुकी है। आरधना कुमारी 

गडहनी ब्लॉक  उ.मा.विद्यालय हदियाबाद (9-10 )में शिक्षिका के रूप कार्यरत हैं। जिन्होंने भगवान की दी हुई अनुपम भेंट  ने दिव्यांगता का रूप दी है। आगे उन्होंने बतायी की जिसकी वजह से बहुत ताने सुनने पड़े ,बहुत कम उम्र में बहुत कुछ मुझे सुनना पड़ा ।गांव घर के लोग मुझे विकलांग का नाम दी। यह बात छोटी उम्र में मुझे बहुत चुभी मैं भी यह बात को ठानी कि इस विकलांगता को मैं अपनी ताकत बनाऊंगी और फिर पढ़ाई पूरी करने के साथ में पर्वतारोहण की ट्रेनिंग लेने लगी।2 साल के अंदर में मैंने सारे कोर्स कर लिए।2017 से पर्वतारोहण शुरूआत की जिसमें 2018 जवाहरलाल पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान पहलगाम, जम्मू-कश्मीर साथ ही साथ स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान माउंट आबू

 जहां से मैंने बेसिक और एडवांस रॉक क्लाइंबिंग कोर्स  किए ।जो दुनिया के गिने चुने रॉक क्लाइंबिंग में से एक आता है।और यह खतरों से भरा हुआ है।2019 नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंट ट्रेनिंग उत्तरकाशी, उत्तराखंड से कोर्स किए और तीन ट्रैक किए। 2019  में दोबारा कोर्स करने के लिए जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंट ट्रेनिंग गई जिसमें एडवांस कोर्स के साथ मैंने मचोई पिक को समिट किया।साथ ही साथ मै  जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में स्थित तुलियन झील  की ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 3,684 मीटर (12,087 फीट) है। मेचोई पीक भारत के लद्दाख के द्रास क्षेत्र में 17,907 फीट की ऊंचाई,माउंट फ्रेंडशिप,हिमाचल प्रदेश  5,287 मीटर (17,346 फीट) , 

नाग टिब्बा ट्रेक,ऊंचाई: ~9,915 फीट ,केदारकंठ उत्तराखंड के  12,500 फीट (3,800 मीटर) ऊँचा विंटर ट्रेक ,2021 में युनाम चोटी  पर  6,111 मीटर (लगभग 20,049 फीट) है। जिसके लिए स्पॉन्सर मुझे  जितौरा  की मुखिया अर्पणा सिन्हा ने किया था।और छोटी छोटी ट्रेनिंग और ट्रेक की। यह सब तो कर रही थी मेरे को सरकारी अधिकृत सर्टिफिकेट भी मिल रहे थे ।जिस में मैं चौथे नंबर पर थी बिहार से और भोजपुर से पहले नंबर पर, वह भी दिव्यांग तो पहली ही थी।इतने सारे कोर्स करने के बाद में जब मैं अपने ब्लॉक पीरों में आई तो मुलाकात मेरी अनिल सर से हुई जिन्होने मुझे समझा और पारखा।मैंने साइकिल अभियान पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ का अभियान भी किया।4 साल मै शांत रही जो की मेरे लिए खास दिन रहे शादी और शिक्षा विभाग मे नौकरी इसी बीच मेरी बेटी आई जो अभी 15 महीने की है।और मै पैराग्लाइडिंग ट्रेनिंग की,जो 8 दिन का था।पायलट ट्रेनिंग की और 4 बार 2 दिन में पैराग्लाइडिंग की जो दुनिया का सबसे ऊँचा पैराग्लाइडिंग क्षेत्र बीर बिलिंग  जो भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। बिलिंग पीक नाम की 9000 फीट ऊँची चोटी से, मैंने पैराग्लाइडर के साथ सफलतापूर्वक उड़ान भरी। 12,000 फीट की ऊँचाई तक पहुँचने के बाद, मैंने दुनिया के सबसे ऊँचे पैराग्लाइडिंग स्थल से सफलतापूर्वक लैंडिंग की। ऐसा करने वाली मैं उन बहुत कम पैराग्लाइडिंग पायलटों में से एक हूँ—और बिहार की पहली दिव्यांग महिला हूँ।और में आने वाले दिनों में P4 करना चाहती हूं ।और मुझे अन्नपूर्णा छोटी के साथ सेवन समिट्स करना है जो कि हमारे क्षेत्र और विभाग के लिए गौरव की बात होगी ।यह करना एक नॉर्मल व्यक्ति के लिए बहुत कठिन होगा पर मैं एक दिव्यांग साहसिक हूं। और आगे मैं यही सब को यही संदेश देना चाहूंगी कि कोई दिमाग से विकलांग होता है ना की शरीर से होता है।

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