जिदान टावर्स पर कार्रवाई कब ?
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Apr 20, 2026
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एक मंजिल का ओसी, 12 मंजिल तक उपयोग से पालिका को नुकसान।
तहसीलदार लगा चुके हैं 46 लाख जुर्माना
भिवंडी। भिवंडी-निजामपुरा के मिल्लतनगर क्षेत्र में स्थित जिदान टावर्स को लेकर बड़ा अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि इमारत को केवल एक मंजिल तक ‘वापर दाखिला’ (ओसी) मिलने के बावजूद 12 मंजिल तक उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे भिवंडी महानगरपालिका को हर साल लाखों रुपये के टैक्स का नुकसान हो रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता फहाद अंजुम शेख ने पालिका आयुक्त अनमोल सागर और नगर विकास विभाग को शिकायत पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, निजामपुरा गांव के मिल्लतनगर स्थित सर्वे नंबर 37/0, 38/0, 74/3, 134/अ, 134/ब (भूखंड क्रमांक 16, सिटी सर्वे नं. 4039) पर स्टोन वर्क डेवलपर्स द्वारा "जिदान टावर्स" नामक इमारत का निर्माण किया गया है। प्रोजेक्ट से जुड़े भागीदार शाहनवाज फारूक अहमद मोमिन समेत अन्य लोगों को 23 अगस्त 2021 को ग्राउंड फ्लोर से 12 मंजिल तक निर्माण की अनुमति मिली थी।
बताया गया कि 31 मार्च 2023 को बिल्डर को केवल तल मंजिल के 5 गाले और पहली मंजिल के 11 गाले के लिए ही आंशिक ‘वापर दाखिला’ मिला। इसके बावजूद आरोप है कि बिल्डर ने बिना पूर्ण ओसी प्राप्त किए 12वीं मंजिल तक के फ्लैट और दुकानों की बिक्री और किराए पर देना शुरू कर दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस अवैध उपयोग के कारण पालिका को मिलने वाला कर राजस्व प्रभावित हो रहा है। यदि पूरी इमारत नियमानुसार उपयोग में लाई जाती, तो पालिका को लाखों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता था। मामले में खनिज रॉयल्टी चोरी का भी आरोप लगाया गया है। जानकारी के अनुसार, तहसीलदार ने इस पर कार्रवाई करते हुए 6.20 लाख रुपये का दंड और अवैध उत्खनन व भराव के लिए 42.89 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है।
पालिका के उप अभियंता एजाज घोरी ने पुष्टि की कि अब तक केवल ग्राउंड फ्लोर के 5 गाले और पहली मंजिल के 11 गाले के लिए ही ओसी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि 12 मंजिल तक उपयोग किए जाने की शिकायत मिली है और इसकी जांच की जा रही है। वहीं, शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले में कुछ पालिका अधिकारियों और प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट वाहिद अहमद अंसारी की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा, जमीन पर महसूल विभाग का करीब 48 लाख रुपये बकाया होने की बात भी सामने आई है। अब इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला भिवंडी में निर्माण अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन सकता है।


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