संघर्ष से सफलता तक: रेलकर्मी सुरेंद्र कुमार बने 70वीं बीपीएससी में प्रखंड एससी-एसटी कल्याण पदाधिकारी
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jun 23, 2026
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ब्यूरो चीफ प्रेम कुमार की रिपोर्ट
गयाजी-- कठिन परिश्रम, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिणाम तब और प्रेरणादायक बन जाता है जब सफलता लंबे संघर्ष के बाद मिले। नवादा जिले के मूल निवासी एवं वर्तमान में गया रेलवे स्टेशन पर कार्यरत सुरेंद्र कुमार ने 70वीं बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में प्रखंड अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी (Block SC & ST Welfare Officer) के पद पर चयनित होकर यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, मेहनत और लगन से मंजिल हासिल की जा सकती है।
सुरेंद्र कुमार (रोल नंबर- 440686) इससे पूर्व 66वीं बीपीएससी तथा अनुमंडल कृषि पदाधिकारी परीक्षा के साक्षात्कार तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने प्रयास जारी रखे।
उनकी संघर्ष यात्रा वर्ष 2002 से शुरू हुई। तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में रेलवे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए भर्ती की जिम्मेदारी चयन परिषदों से हटाकर आरआरबी सिकंदराबाद को सौंपी गई थी। इसी भर्ती प्रक्रिया में उनका चयन हुआ और 25 अक्टूबर 2004 से उन्होंने रेलवे सुरक्षा विशेष बल में सेवा शुरू की।
रेलवे सेवा से पहले वे ग्रामीण डाक व्यवस्था में ग्रामीण पोस्टमास्टर के रूप में कार्य कर चुके थे तथा कुछ समय तक सीमा सुरक्षा बल (BSF) में भी अपनी सेवाएं दी थीं। वर्ष 2004 से लगातार रेलवे सुरक्षा विशेष बल में कार्य करने के बाद 29 अगस्त 2013 को विशेष आग्रह पर उनका स्थानांतरण रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में हुआ और वे गया रेलवे स्टेशन पर पदस्थापित हुए।
वर्ष 2018 में एक सड़क दुर्घटना में दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद उन्हें रेलवे के वाणिज्य विभाग में कार्यालय अधीक्षक के पद पर पदस्थापित किया गया। वर्ष 2020 से वे गया रेलवे स्टेशन स्थित क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय में कार्यरत हैं।
नौकरी के साथ-साथ निरंतर अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखते हुए उन्होंने आखिरकार 70वीं बीपीएससी में सफलता हासिल की। उनकी यह उपलब्धि न केवल रेलवे कर्मियों बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
सुरेंद्र कुमार की सफलता यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण चरण है। संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


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