राष्ट्र में जारी असंवैधानिक काले कानूनों के विरुद्ध 26 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे राष्ट्रवादियों का चौथे दिन भी अनशन जारी

राष्ट्र द्रोहियों द्वारा अपराधिक कानूनों की वृद्धि कर सवर्ण समाज को गुलाम बनाने कि प्रयास, बावजूद काले कानूनों की रचनाकारों से भी राष्ट्रवादियों को न्याय की उम्मीद

मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु हो सकता है उग्र आंदोलन, राष्ट्र गृहयुद्ध की दहलीज पर 

अखिल भारतीय समाचार टीम 

वाराणसी----- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र अंतर्गत वरुणा नदी स्थित शास्त्री घाट पर, राष्ट्र में जारी असंवैधानिक काले कानूनों की रचनाकारों से न्याय की उम्मीद लिए, 26 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे राष्ट्रवादियों का लगातार चौथे दिन भी अनशन जारी।

आपको बता दें कि भारतीय संविधान के अनुसार, देश के हर नागरिक को छ: मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनका वर्णन संविधान के भाग-3 अनुच्छेद 12 से 35 में किया गया है। अनुच्छेद 14 से 18 कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं। धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।पर वर्तमान समय देखा जाए तो संविधान के अनुच्छेद में छेद कर सत्ता लोलुप राष्ट्र के तथाकथित नेतृत्वकर्ताओं द्वारा सत्ता की लोलुपता में लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे कानून सर्वसम्मति से पारित कर एक वर्ग के अधिकारों को रौंदते हुए गुलाम बनाने की प्रयास जारी है।अनुच्छेद 25-28 हर व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की पूरी छूट है। पर वर्तमान समय में सत्ता पक्ष की सह पर व्यवाचारियों द्वारा सनातन धर्म पर चोट लगातार जारी है। इतना ही नहीं विरोध करने पर व्यभिचारियों द्वारा राष्ट्र के संविधान की अनुच्छेद में छेद कर बनाए गए काले कानूनों एस सी एस टी एक्ट के तहत सवर्ण समाज को सलाखों के पीछे भी डलवाने की साजिश रचा जाता है। जिससे व्यथित हो राष्ट्रवादियों द्वारा राष्ट्र के कोने-कोने से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। 

काले कानूनों की रचनाकारों से भी राष्ट्रवादियों को न्याय की उम्मीद

क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी वरूणा नदी स्थित शास्त्री घाट पर विगत 29 अगस्त से समाज सेवक बृजेश मिश्र के नैतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है।विगत 20 सितंबर को महापंचायत में राष्ट्र के कोने-कोने से पहुंचे राष्ट्रभक्तों द्वारा राष्ट्र में समानता की कानून की मांग किया गया।


पर राष्ट्रद्रोही सरकार द्वारा अनुसूना किया गया। अंततः राष्ट्र-विरोधी कानूनों के विरोध में काले कानूनों की रचनाकारों से भी न्याय की उम्मीद रख राष्ट्रवादी बृजेश मिश्र, गौतम मिश्र व चंदन बाबा सनातनी द्वारा आमरण अनशन प्रारंभ किया गया जो चौथे दिन भी जारी है।


अब देखना यह होगा कि क्या सत्ता लोलुप सरकार राष्ट्रवादियों द्वारा मांग की जा रही समानता की कानूनों को लागू किया जाता है या सत्ता की लोलुपता में मनमानी जारी रहेगा।

मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु हो सकता है उग्र आंदोलन राष्ट्र गृह युद्ध की दहलीज पर 

वही देखा जाए तो राष्ट्र बहुत ही दयनीय स्थिति से गुजर रहा है। राष्ट्रवादियों द्वारा बार-बार अपने मौलिक अधिकारों की मांग किया जा रहा है, पर सरकार द्वारा सत्ता की लोलुपता में मनमानी किया जा रहा है। वही राष्ट्रीय सवर्ण समाज संघ सहित अन्य राष्ट्रवादी संगठनों के पदाधिकारीयों


द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया की तानाशाह सरकार यदि शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन से नहीं मानती ये तो उग्र आंदोलन का रुख अपनाया जायेग। पूर्व में भी हमारे समाज के लोगों ने अपनी बलिदान देकर इस्लामिक लूटेरों व अंग्रेजी लूटेरों को भगाया है तो इन काले अंग्रेजों विनाश हेतु बचनबद्ध है।

यदि राष्ट्र की इतिहास देखा जाए तो राष्ट्रवादियों द्वारा अक्सर न्याय हेतु शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन के साथ ही आमरण अनशन अपनाया गया है। और तानाशाह सरकार द्वारा नहीं सुना जाता है तो सरकार के विरुद्ध करो या मरो की बिगुल फूंक दिया जाता है। राष्ट्र की स्थिति देखा जाए तो सरकार की मनमानी की वजह से राष्ट्र गृह युद्ध की दहलीज पर खड़ी है।

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