काश आरा से मुंडेश्वरी धाम रेल लाइन पूरी कराते पीएम


रोहतास।मुंडेश्वरी एक्सप्रेस,सपना वो जो ट्रैक पर ही सो गया।एक यात्रा विकास की गूंज और रेल की खामोशी के बीच दौड रहा है।

कहते हैं, रेलगाड़ी किस्मत बदल देती है और अगर वो रेलगाड़ी प्रस्तावित है तो फिर किस्मत नहीं, सब्र बदल जाता है, आशा स्थगित हो जाती है, और कई बार तो नेता ही बदल जाते हैं।अब देखिए न, बरसों से एक सपना गांव के खेत-खलिहानों से लेकर चाय दुकानों तक दौड़ रहा है।मुंडेश्वरी से आरा तक रेललाइन।सपना भी ऐसा कि सुनते ही बुजुर्ग खटिया छोड़कर स्टेशन की जमीन तलाशने लगते हैं, और बच्चे स्मार्ट क्लास छोड़कर सीधे रेलवे इंजीनियर बनने की कोचिंग पकड़ लेते हैं।ये रेललाइन हर चुनाव में टिकट कटवाती है, लेकिन खुद ट्रैक पर चढ़ने से कतराती है। नेता जी जब घोषणा करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे रेलवे नहीं, जन्म-जन्मांतर की तपस्या पूरी हो रही हो।एक बार तो उन्होंने इतना भावुक भाषण दिया कि कुछ श्रद्धालुओं ने प्रस्तावित ट्रैक पर नारियल फोड़ दिया। अब नारियल फूटे, जनता के सपने नही।रेल मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि यह योजना ‘अत्यंत आवश्यक’ है।इतनी आवश्यक कि पिछले दस सालों से मंत्रालय में ‘योगमुद्रा’ में बैठी है। सुनते हैं अब तक सात रेलमंत्री उस फाइल को नेत्र ध्यान से देख चुके हैं।बस ट्रेन नहीं देखी गई। इधर गाँव में बोर्ड लग गया है—“यहाँ से प्रस्तावित *मुंडेश्वरी-आरा रेललाइन गुजरेगी।”बोर्ड देखकर लोग शादी के कार्ड छपवा रहे हैं।“Reception Venue: Proposed Railway Line, मुंडेश्वरी"। कुछ GPS से लोकेशन भेजकर रिश्तेदारों को दिखाते हैं, मानो कह रहे हों।“यहाँ से हमारी किस्मत निकलेगी।”बस ट्रेन नहीं निकलती।सरकारी अफसरों का बयान क्लासिक है“भौगोलिक सर्वे हो रहा है।”ये सर्वे भी वैसा ही है जैसे इंडिया में डेटिंग ऐप।हर बार नया मैच, पर मुलाकात नहीं।अब आइए विकास की नई गाड़ी पर चढ़ते हैं।प्रधानमंत्री जी 30 मई को बिक्रमगंज आ रहे हैं।पटना एयरपोर्ट का नया टर्मिनल खोलेंगे, बिहटा एयरपोर्ट की नींव रखेंगे, गया-डोभी फोरलेन का उद्घाटन करेंगे, नबीनगर थर्मल पावर में नई स्टेज शुरू करेंगे।जनता सोच रही है।“वाह! सड़कें उड़ रही हैं, प्लेन दौड़ रहे हैं, पावर प्लांट चमक रहे हैं… बस हमारी रेल सो रही है।”कुछ बुजुर्गों ने तो मजाक में कह दिया।“लगता है अब प्लेन से मुंडेश्वरी से आरा जाना होगा, रेलवे तो स्वप्नलोक में व्यस्त है।”युवा तो UPSC में इस योजना को केस स्टडी बना चुके हैं।“विकास और वोट में फर्क समझाइए।”तो जनाब, मुंडेश्वरी-आरा रेललाइन अब घोषणाओं की बुलेट ट्रेन बन चुकी है।तेज भी है, लंबी भी, मगर ट्रैकलेस है।हर बार आश्वासन आता है, नारियल फूटता है, तालियाँ बजती हैं।बस इंजन खामोश रहता है। रेल आए या न आए, विकास की सौगातें जरूर आएंगी।ठीक चुनाव के मौसम में, समय पर, बिना देरी के।क्योंकि वोट की पटरी पर कभी ब्रेक नहीं लगता।

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