
काउंटर प्राथमिकी के कानून से छोटे-मोटे अपराधों में हो रही वृद्धि
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, ब्यूरो चीफ कैमूर
- Jun 10, 2025
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संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की रिपोर्ट
दुर्गावती(कैमूर)-- आजकल अधिकांश मामलों में थाने में दो तरफा प्राथमिकी का दौर देखने को मिल रहा है जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में छोटे-मोटे विवाद और अपराध को बढ़ावा मिल रहा है। जो अपराध किया है और जिसके साथ घटना घटी है दोनों लोग थाने में एक साथ मुकदमा दर्ज कराते हैं जिसका परिणाम है की पीड़ित लाचार और विवश होकर केस में सुलहनामा लगा देता है, जिससे घटना को अंजाम देने वालों का मनोबल बढ़ जाता है। हालांकि की प्रशासन जानता है की मूल अपराधी कौन है, ग्रामीण जनता और चौकीदार उसके सूत्र है वह बारीकी से पता लगा सकता है लेकिन कानूनी मजबूरी में वह कुछ कर नहीं पाता और दोनों की प्राथमिकी दर्ज कर लेता है। छोटे-मोटे अपराधों में उचित धारा नहीं लगाने के कारण भी अपराधी जल्द सलाखों से बाहर आ जाते हैं,और उनके मनोबल और बढ़ जाते हैं। सचमुच यदि मामला थाने मे आने के बाद दिए गए आवेदन की जांच करने के बाद प्राथमिक दर्ज की जाती तो अपराध करने वाला थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं करा पाता जिससे छोटे-मोटे अपराधियों का हौसला बुलंद न होकर पस्त हो जाता और अपराध की गतिविधियों में कमी आती। मानवाधिकार का कानून लागू होने के कारण अपराधियों के साथ पुलिस शक्ति से नहीं निपट पाती है जिसके कारण भी अपराध में बढ़ोतरी हो रही है। यदि सचमुच अपराध में कमी लाना है तो सरकार को चाहिए कि मामले का सही जांच पड़ताल करके उचित धारा में थाने में प्राथमिकी की दर्ज की जाए जिससे अपराध में कमी आ सके और पीड़ित को ही प्राथमिक करने का हक मिलना चाहिए पीड़ा देने वाले को नहीं।
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