नदी पार कर स्कूल जाते मासूम


रोहतास ।प्रखंड क्षेत्र के रोहतास गढ़ पंचायत के तारडीह विद्यालय में प्रतिदिन सैकड़ो मासूम स्कूली बच्चे जान जोखिम में डाल बरसती नदी को पार कर रहे है। 

सरकार भले ही शिक्षा और विकास पर करोड़ों खर्च करने का दावा करे, लेकिन रोहतासगढ़ पंचायत की हकीकत तस्वीरों में साफ झलक रही है। यहां मासूम बच्चों को रोजाना नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है। इन नन्हें कदमों को न तो सरकार की योजनाओं ने सुरक्षित राह दी और न ही प्रशासन ने सुध ली। बता दे कि एक समय में यह नक्सलियों की तूती बोलती थी उस समय शिक्षा का महत्व तक लोग को पता नहीं था। लेकिन जब आज अपने मौलिक अधिकार वनवासियों लेना चाहते है तो। तो सरकार की अनदेखी भी बाधक नहीं बन रही है। 

जानकारी हो कि बरसात के दिनों में यह आवसानी नदी है जो इस क्षेत्र के अधिक पानी वाला जाना जाता है। यह बरसात के दिनों में मौत का दरिया सा जाती है। कई बार हादसे की नौबत आ चुकी है, लेकिन ग्रामीणों की तात्पर्यता और विद्यालय प्रशासन की देख रेख में बच्चों को नदी से पार कराया जाता है। लेकिन अधिकारियों की नींद अब तक नहीं टूटी।

पंचायत के मुखिया नागेंद्र यादव ने साफ कहा कि वर्ष 2022 में ही पंचायती राज मंत्री मुरारी गौतम से मिलकर आवेदन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। साथ ही जिला के कई वरीय अधिकारियों को भी मांग किया गया कि इस विद्यालय में नदी पार कर हरैया डीह, आम डीह कोडियारी सहित पांच गांव के बच्चे आते है। या तो पुलिया छलका का निर्माण हो या उन गांवों में भी शिक्षा की व्यवस्था कराई जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बच्चों की जान जाने के बाद ही क्या सरकार जागेगी?


वही ग्रामीणों का कहना है कि नेता चुनाव आते ही बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए न तो पुलिया बनी, न ही वैकल्पिक रास्ता तैयार हुआ।


ऐसे हालात में विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

रिपोर्टर

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