मच्छरों का आतंक, नए-नए रोगों का हो रहा जन्म

 संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की रिपोर्ट 

दुर्गावती(कैमूर)-- इन दिनों मच्छरों के प्रकोप से नई-नई बीमारियां लोगो में फैल रही हैं। जिसका इलाज क्षेत्र में सफल डॉक्टर, सफल जांच केंद्र  न होने से असंभव प्रतीत हो रहा है। जिसका परिणाम है कि लोग बेहतर इलाज के वाराणसी चले जाते हैं, जहां उनका बड़े पैमाने पर पैसों का दोहन होता है। साधारण तह प्रारंभिक दौर में मच्छरों के प्रभाव से होने वाले बीमारी का इलाज गांव में झोले छाप डाक्टर या ग्रामीण किसी डॉक्टर के हाथ सीखे हुए ग्रामीण डॉक्टर के पास नहीं है।रोग बढ़ने पर प्रखंड मुख्यालय तथा उससे भी भयंकर होने पर बाहर जाना पड़ता है ।जिससे रोगी कभी-कभी  काल के गाल में भी समा जाते है। अक्सर गांव से निकलने वाले नाबदान और शौचालय का जल गांव के मुख्य निकास मार्ग या गांव में निर्मित पोखरी तालाब में जा रहा है, जिसका पानी कहीं बाहर क्षेत्र में नहीं जा पाता जिसके कारण गंदगी और रोग फैलने की आशंका बढ़ जाती है। पूर्व की सरकार के द्वारा अक्सर गांव में साल में दो बार मच्छर मारने की दवा का छिड़काव किया जाता था, जिसके कारण मच्छरों की संख्या कम रहती थी, और रोग कम होता था। लेकिन वर्तमान की सरकार शौचालय तो बनवा दिया लेकिन जल निकासी का प्रबंध नहीं कर पाई जिसके कारण रोग की मात्रा बढ़ती जा रही है, साथ ही लोग मृत्यु का शिकार होते जा रहे हैं। गांव में अक्सर जलाशयों को ग्रामीणों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है, लेकिन सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कानून बनने के बाद भी कदम नहीं उठा पाती। गांव के नाबदान और शौचालय का पानी गांव की गलियों में तथा चौक चौराहों पर बिखरा पड़ा  रहता है, जिसके कारण अधिक मच्छरों का प्रकोप देखने को मिलता है। यदि समय रहते सरकार इस पर  ध्यान नहीं देती है तो आने वाले भविष्य में इसका परिणाम और भयावह होगा।

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