समाज के पतन का कारण ये पांच महामारियां - चंदेश्वर योगभारती


ब्यूरो चीफ अनिल कुमार सिंह 

 

भोजपुर ।शक्तिपुत्र जी महाराज कहते हैं कि आज समाज में पाँच महामारियाँ हैं। यदि ये पाँच महामारियाँ दूर हो जायें, तो समाज की सभी समस्याओं का समाधान हो जाये। वे पाँच महामारियाँ हैं- नशा, मांस, भ्रष्टाचार, सम्प्रदायवाद और नास्तिकता।


नशा मनुष्य के पतन का मूल कारण है। यदि समाज को केवल नशामुक्त कर दिया जाये, तो समाज की जितनी समस्यायें हैं, उनमें तत्काल सुधार होना प्रारम्भ हो जायेगा। नशे से अपने आपको मुक्त करो, अपने बच्चों को मुक्त करो, समाज को मुक्त करो। 


माँसाहार पतन का दूसरा मुख्य कारण है। जिस तरह का हमारा आहार होगा, वैसे ही हमारे विचार बनेंगे। माँस का भक्षण करने वाला अगर वास्तव में कह दिया जाये, तो न तो अपने बच्चों से प्रेम करता है, न अपने परिवार से प्रेम करता है और समाज से तो प्रेम करेगा ही नहीं। अपने निज स्वार्थ के लिए तथा जीभ के क्षणिक स्वाद के लिए क्यों किसी जीव की हत्या करना ? ये एक महापाप है। देवी-देवताओं के नाम पर जो बलि दी जाती है, यह तो सबसे बड़ा महापाप है। उन मन्दिरों पर कभी शक्तियाँ वास नहीं करतीं जहाँ किसी जीव की बलि दी जाती है।


भ्रष्टाचार पतन का तीसरा मुख्य कारण है। हम भ्रष्टाचारी और अधर्मी राजनेताओं को सहयोग देना बन्द कर दे।समाज को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का सतत प्रयास करे।भ्रष्टाचार का धन अपने घर में लाने की अपेक्षा भूखों मर जाना ज्यादा अच्छा है।


चौथी महामारी सम्प्रदायवाद है। मानव सभ्यता के लिए जातिगत भेदभाव एक कलंक है। हमें समाज में सभी जाति, धर्म, सम्प्रदाय को एकसमान मान करके चलना चाहिए। जातीयता के, सम्प्रदायवाद के जितने संगठन चलेंगे, उतना ही देश में अशान्ति फैलेगी।


समाज की पांचवी सबसे बड़ी बिडम्बना है- नास्तिकता। मूर्तिपूजा का विरोध करने वाले घोर अज्ञानी हैं। हर कल में मूर्ति पूजा होती आई है।


भगवती मानव कल्याण संगठन के जो लक्ष्य हैं कि हम इन महामारियों को दूर कर रहे हैं और जिस दिन ये महामारियाँ जितनी दूर होती चली जायेंगी, समाज में सहजभाव से उतना सुधार होता चला जायेगा।

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