कुलेश्वरी धाम मेले में हुई मारपीट, बीच बचाव में महंत के परिजन घायल
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 05, 2026
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दुर्गावती संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय कि रिपोर्ट
दुर्गावती (कैमूर):-- दुर्गावती प्रखंड के अंतर्गत प्राचीन जिला शाहाबाद था तबसे मां कुलेश्वरी देवी धाम मे अति प्राचीन मेला लगता आरहा है जो आज भी लगा हुआ है। कैमूर जिले में कुल्हड़िया का मेला सबसे बड़ा और अधिक लंबे समय तक चलने वाला धार्मिक मेला है जो करीब 300 वर्षों से भी पहले से लगता आरहा है। लेकिन बीच मे यह मेला राजनीतिक उपेक्षाओं के कारण आज तक मेले और इस धाम का विकास नहीं हुआ। बतादे की मेले में हजारों की संख्या में उत्तर प्रदेश बिहार के लोग मेला में मां कुलेश्वरी देवी का दर्शन करने और मेला घूमने के लिए आते हैं। मेले में बहुत दूर दूर के दुकानदार अपना अपना सामान लेकर मेले में उपस्थित रहते हैं। इसी दौरान शनिवार को मेला मे कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा मेले में उपस्थित झूला वालों के साथ मारपीट की जाने लगी जिसकी जानकारी झूला वालो के द्वारा महन्त लल्लन गिरी को दी गई। इसके बाद मेला मलिक के परिजन मौके पर पहुंचे तो उनके साथ भी असामाजिक तत्वों के द्वारा मारपीट की गई। बताया जा रहा है की मारपीट करने वाले युवक इसी इलाके के अज्ञात थे जिसे पहचान नहीं जा सका। इस संबंध में पूछे जाने पर कुलेश्वरी देवी धाम के महन्त लल्लन गिरी ने बताया कि यह मेला लगभग 300 वर्ष से भी ज्यादा समय से यहां पर लगते आ रहा है। और उन्होंने बताया कि पूर्व की भांति इस वर्ष भी मेला का अनुमंडल पदाधिकारी मोहनिया से परमिशन लिया गया है ताकि मेले में सुरक्षा व्यवस्था कायम रह सके। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को लिखित सूचना मेरा द्वारा मेला लगने से पूर्व दे दी गई थी लेकिन प्रशासन के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई जिसके कारण यह घटना घटी। इस संबंध में पूछे जाने पर अनुमंडल पदाधिकारी मोहनिया रत्ना प्रियदर्शनी ने बताया कि मेला का परमिशन हुआ है सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और मजिस्ट्रेट स्वास्थ्य विभाग की टीम की तैनाती की गई है। लेकिन परमिशन के बाद भी सरकारी तंत्र मेले में उपस्थित नहीं है यह प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। जबकि पूर्व में मेले में प्रशासन के द्वारा उचित व्यवस्था की जाती थी और मजिस्ट्रेट समेत सुरक्षा बल के साथ एक पुलिस पदाधिकारी मेले में तब तक रहता था जब तक मेले में परमिशन का समय निर्धारित रहता था। वैसे देखा जाए तो देहातो से और सुदूर इलाको से किसी के घर की मां-बहन और बेटी मेले में दर्शन करने के लिए और घूमने के लिए आती है और किसी के द्वारा किसी के मां बहन के ऊपर फब्तियां कसी जाय तो क्या उचित है क्या वैसे तत्वों को अपनी मां बहन याद नहीं आती।


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