कानूनी अधिकारों से सशक्त होगा दुम्मा: पीड़ित महिलाओं को 10 लाख तक के मुआवजे की जानकारी

ब्यूरो चीफ अंकित कुमार की रिपोर्ट 

शिवहर--  जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रयासों से शनिवार को तरियानी के दुम्मा गांव में कानून की चौपाल सजी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार और सचिव ललन कुमार रजक के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को अदालती उलझनों से बचाकर उनके अधिकारों से रूबरू कराना था।

शिविर की मुख्य उपलब्धियां:

पीड़ित महिलाओं को सहारा: पैनल अधिवक्ता शंभू कुमार ने बताया कि नालसा (NALSA) की मुआवजा योजना 2018 के तहत अपराध से पीड़ित महिलाओं को 1 लाख से 10 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा सकती है।सामाजिक मुद्दों पर प्रहार: कार्यक्रम में 'बाल विवाह मुक्त भारत' का संकल्प दोहराया गया और ट्रांसजेंडर अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता जगाई गई।लोक अदालत का निमंत्रण: ग्रामीणों को बताया गया कि 9 मई 2026 को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक लोन, बिजली बिल और आपसी विवादों का जीरो खर्च पर परमानेंट समाधान होगा।

"कानूनी उलझनों को आपसी सहमति से खत्म करने का सबसे बेहतरीन मंच लोक अदालत है। यहाँ का फैसला अंतिम होता है और कोई अपील नहीं होती।

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