15 वर्षीय छात्रा से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

पास्को कोर्ट ने स्पीडी ट्रायल में सुनाया फैसला

संवाददाता रूपेश कुमार दूबे की रिपोर्ट 

भभुआ (कैमूर)----- 6 अगस्त। कैमूर जिले के विशेष न्यायाधीश (पास्को) सह एडीजे-6 प्रमोद कुमार पाण्डेय की अदालत ने 15 वर्षीय छात्रा से दुष्कर्म के मामले में गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी पर ₹50,000 का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह फैसला दुर्गावती थाना कांड संख्या-122/2024 एवं पास्को विचारण संख्या-82/2024 में स्पीडी ट्रायल के तहत सुनाया गया। न्यायालय ने दुर्गावती थाना क्षेत्र के सावठ गांव निवासी रामबचन कुशवाहा के पुत्र दीपक कुशवाहा को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 4(2) के तहत दोषी ठहराया।

कैमूर जिला पॉक्सो एक्ट के विशेष लोक अभियोजक शशि भूषण पांडेय ने बताया कि 3 मई 2024 की सुबह करीब 8 बजे 15 वर्षीय पीड़िता अपने विद्यालय जा रही थी। आरोप है कि उसी दौरान आरोपी मोटरसाइकिल से उसका पीछा करते हुए एक सुनसान स्थान पर पहुंचा और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।

घटना के बाद पीड़िता की शिकायत पर दुर्गावती थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने मामले का अनुसंधान शुरू किया और जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होने पर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों की गवाही कराई। इसके अलावा दस्तावेजी साक्ष्य एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रमाण भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने सभी गवाहों के बयान, दस्तावेजों तथा मामले की समस्त परिस्थितियों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।

दोषसिद्धि के बाद अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹50,000 अर्थदंड की सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक शशि भूषण पांडेय ने बताया कि इस मामले में जिला अभियोजन शाखा द्वारा त्वरित समन्वय और प्रभावी पैरवी की गई। इसके कारण मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के माध्यम से शीघ्र पूरी हो सकी और पीड़िता व उसके परिजनों को कम समय में न्याय मिला।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को कठोर सजा मिलने से समाज में यह संदेश जाता है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति कानून पूरी सख्ती से कार्रवाई करता है। साथ ही इससे पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होता है।

यह फैसला बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय और प्रभावी अभियोजन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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