कैमूर में शिक्षा व्यवस्था के दावों की खुली पोल, स्कूल तक पहुंचने के लिए कीचड़ से जूझ रहे बच्चे
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Aug 10, 2026
- 12 views
मोहनिया के पुसौली उत्क्रमित मध्य विद्यालय की बदहाल तस्वीर, पक्की सड़क के अभाव में छात्र-छात्राएं परेशान
संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट
कैमूर। जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने के सरकारी दावों के बीच मोहनिया प्रखंड के पुसौली गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए आज तक पक्के संपर्क पथ का निर्माण नहीं हो सका है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ और जलजमाव से भर जाता है। बारिश होते ही रास्ते की हालत ऐसी हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर पानी जमा रहने के कारण रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जूते-चप्पल हाथ में लेकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
विद्यालय जाने वाले बच्चों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बरसात के दिनों में कई छात्र-छात्राएं अपने जूते और चप्पल हाथ में लेकर कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। बच्चों को डर रहता है कि कीचड़ में उनके स्कूल ड्रेस और जूते खराब न हो जाएं।
सुबह-सुबह जब बच्चे स्कूल जाने के लिए घर से निकलते हैं तो उन्हें साफ-सुथरे कपड़ों में विद्यालय पहुंचने के लिए इस कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में फिसलन इतनी अधिक रहती है कि बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, रास्ते में फिसलकर कई बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
सामान्य दिनों में किसी तरह लोग इस रास्ते से होकर विद्यालय तक पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। जलजमाव और कीचड़ के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी समय लग जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। स्कूलों में बेहतर शिक्षा, भवन, शौचालय, पेयजल और अन्य सुविधाओं को लेकर लगातार काम किए जाने की बात कही जाती है। लेकिन जब बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए ही सुरक्षित और पक्का रास्ता उपलब्ध नहीं है, तो सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभ पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी विद्यालय से पढ़े हैं सांसद मनोज तिवारी
इस विद्यालय की एक खास बात यह भी है कि दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी अभिनेता-गायक मनोज तिवारी ने भी इसी विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी।
जिस विद्यालय से देश की राजधानी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की, उसी विद्यालय तक आज भी बरसात के मौसम में बच्चों और शिक्षकों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति विद्यालय और पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।
लोगों का सवाल है कि जब इतने वर्षों में विद्यालय तक एक पक्का संपर्क पथ नहीं बन पाया है, तो यहां पढ़ने वाले बच्चों को आखिर कब तक इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा?
प्रधानाध्यापक ने बताई समस्या
विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरिशंकर पाल ने बताया कि बरसात के दिनों में विद्यालय पहुंचने में बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी काफी परेशानी होती है। विद्यालय के आगे निजी जमीन होने के कारण संपर्क पथ के निर्माण में समस्या आ रही है।
प्रधानाध्यापक के अनुसार, इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवेदन भी दिया जा चुका है। विद्यालय प्रबंधन की ओर से लगातार इस समस्या की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई है, लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
प्रधानाध्यापक ने बताया कि बारिश के दौरान रास्ते में पानी और कीचड़ जमा हो जाने के कारण बच्चों को काफी परेशानी होती है। कई बार अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंतित रहते हैं।
अधिकारियों को दी गई जानकारी
विद्यालय तक पक्का संपर्क पथ नहीं होने की समस्या को लेकर अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग और प्रशासन जमीन से जुड़ी समस्या का समाधान कर संपर्क पथ निर्माण का रास्ता साफ कर दें, तो विद्यालय आने वाले सैकड़ों बच्चों को बड़ी राहत मिल सकती है।
एसडीएम ने दिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश
इस मामले में एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी ने कहा कि विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते की समस्या की जानकारी उन्हें मिली है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया है।
प्रशासन के इस आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों और विद्यालय परिवार को उम्मीद है कि समस्या का जल्द समाधान निकलेगा और विद्यालय तक सुरक्षित संपर्क पथ का निर्माण कराया जाएगा।
ग्रामीणों की मांग—जल्द बने पक्की सड़क
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधितए विभाग से मांग की है कि विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते की समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान किया जाए। लोगों का कहना है कि बच्चों को बरसात के मौसम में कीचड़ और जलजमाव से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जो किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।
ग्रामीणों की मांग है कि निजी जमीन से जुड़ी समस्या का प्रशासनिक स्तर पर समाधान कर विद्यालय तक पक्की सड़क या संपर्क पथ का निर्माण कराया जाए, ताकि छात्र-छात्राएं सुरक्षित तरीके से विद्यालय पहुंच सकें।
अब देखना यह होगा कि अधिकारियों के निर्देश के बाद पुसौली गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते की तस्वीर कब बदलती है और बच्चों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से कब निजात मिलती है।


रिपोर्टर