30 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है डेहरी अनुमंडल सिविल कोर्ट


संवाददाता पारसनाथ दुबे


 डेहरी रोहतास।डेहरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय की स्थापना 12 अप्रैल 1996 को पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश के द्वारा की गई थी। न्यायालय का विधिवत उद्घाटन भी उन्हीं के कर-कमलों से हुआ था।


स्थापना के करीब 30 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह न्यायालय आज तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।


न्यायालय का भवन तो बन गया, लेकिन वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम जनता के बैठने के लिए आज भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी और बरसात में लोगों को खुले में खड़ा रहना पड़ता है। परिसर में पेयजल, शौचालय और छायादार शेड जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।


अनुमंडल अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष उमाशंकर पांडे के अथक प्रयास और लंबे संघर्ष के बाद डेहरी को नया न्यायालय परिसर मिला है। 9 एकड़ 44 डिसमिल में लगभग 35 करोड़ की लागत से भवन निर्माण विभाग द्वारा नए कोर्ट भवन का निर्माण किया गया हैजिससे क्षेत्र के लोगों को न्याय पाने में सहूलियत होगी।


गौरतलब है कि डेहरी व्यवहार न्यायालय का क्षेत्र यूपी और एमपी सीमा से सटा है, जहां 98 किलोमीटर दूर-दराज से पीड़ित पक्ष न्याय पाने के लिए आते हैं। नए भवन के निर्माण को न्यायिक कार्यों में मील का पत्थर माना जा रहा है। कोर्ट परिसर के बाहर बाइक एवं साइकिल स्टैंड बना हुआ है फिर भी लोगों द्वारा बाइक एवं साइकिल जहां अधिवक्ताओं का बैठने का जगह है उसी रास्ते में लग जाने के कारण अधिकारियों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इस संबंध में कई अधिवक्ताओं ने प्रशासन से गुहार लगाया है की यहां से बाइक हटाकर स्टैंड में लगाने का दबाव डाला जाए जो लोग नहीं लगाते हैं उन्हें अर्थ दंड लगाया जाए।

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