अस्पताल या 'जुगाड़' केंद्र? फ्रैक्चर पैर पर कार्टून बांधकर मरीज किया रेफर, मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट

कैमूर---- जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल का है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक के फ्रैक्चर पैर को मेडिकल स्प्लिंट या अन्य चिकित्सकीय संसाधन से सपोर्ट देने के बजाय कथित तौर पर गत्ते यानी कार्टून के टुकड़े का सहारा लेकर बांध दिया गया और मरीज को बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

घटना ने सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और इमरजेंसी सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं


दरअसल, मोहनियां थाना क्षेत्र के मुजान गेट के पास पिकअप वाहन की टक्कर से बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया। घायलों में शहबाजपुर निवासी प्रिंस कुमार के पैर में गंभीर चोट बताई जा रही है और पैर में फ्रैक्चर होने की बात सामने आई। घायल युवक को अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया, लेकिन यहां जो तस्वीर सामने आई, उसने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

बताया जा रहा है कि मरीज के फ्रैक्चर पैर को स्थिर रखने के लिए अस्पताल में जरूरी मेडिकल स्प्लिंट या उपयुक्त संसाधन उपलब्ध नहीं था। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने कथित तौर पर गत्ते के एक टुकड़े को पैर के सहारे के रूप में इस्तेमाल किया।युवक के टूटे हुए पैर पर कार्टून का टुकड़ा बांधकर उसे रेफर किए जाने की तस्वीर और घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

सवाल यह है कि आखिर अस्पताल में मेडिकल स्प्लिंट तक क्यों नहीं?

मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल कोई छोटा स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। यह अनुमंडल स्तर का महत्वपूर्ण सरकारी अस्पताल है। इसके अलावा मोहनियां क्षेत्र से होकर नेशनल हाईवे गुजरता है, जिस कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाओं के मामले सामने आते हैं और घायलों को इलाज के लिए इसी तरह के सरकारी अस्पतालों में पहुंचाया जाता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी सड़क हादसे में किसी मरीज के हाथ या पैर में गंभीर चोट आती है तो उसे प्राथमिक स्तर पर स्थिर रखने के लिए आवश्यक मेडिकल सामग्री अस्पताल में उपलब्ध क्यों नहीं रहती? फ्रैक्चर के मरीज को रेफर करना अपनी जगह हो सकता है, लेकिन रेफर किए जाने से पहले घायल अंग को उचित तरीके से सपोर्ट देना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

'रेफरल सेंटर' बनकर रह गया अस्पताल?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल में गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के बजाय अक्सर उन्हें दूसरे बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है।

लोगों का कहना है कि अगर अनुमंडल स्तर के अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी संसाधन ही पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होंगे तो सड़क हादसों में घायल मरीजों को तत्काल और सुरक्षित चिकित्सा सुविधा कैसे मिलेगी?

विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में शुरुआती उपचार और मरीज को सुरक्षित तरीके से स्थिर करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अस्पताल में जरूरी उपकरण और मेडिकल सामग्री की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवालों को स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता से लेना चाहिए।

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