हर थाने में लगे CWPO का नाम-पता वाला बोर्ड : संतोष उपाध्याय
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Sep 19, 2026
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संवाददाता पारसनाथ दुबे
डेहरी रोहतास। किशोर न्याय कानून के 10 साल पूरे होने पर बाल अधिकार कार्यकर्ता ने उठाया जवाबदेही का सवाल।
किशोर न्याय अधिनियम लागू होने के 10 साल बाद भी बिहार के थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPO) की पहचान सार्वजनिक नहीं हो पाई है। बाल अधिकार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय ने बिहार पुलिस मुख्यालय से मांग की है कि प्रदेश के हर थाने में CWPO का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर वाला बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाया जाए।
उपाध्याय ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 107 में हर थाने में CWPO और हर जिले में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) का प्रावधान है। JJ मॉडल रूल्स के नियम 8(6) में भी इन अधिकारियों का संपर्क विवरण थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत में इसका पालन नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि थाने में आने वाले बच्चों के मामलों में CWPO की भूमिका सबसे अहम होती है। संपर्क नंबर सार्वजनिक न होने से बच्चों, अभिभावकों, CWC, JJB और अधिवक्ताओं को परेशानी होती है। सिर्फ कागज पर नियुक्ति से काम नहीं चलेगा। CWPO को JJ एक्ट, पॉक्सो एक्ट और बाल-मित्रवत पुलिसिंग का नियमित प्रशिक्षण देना होगा।
उन्होंने मांग की कि प्रत्येक थाने में CWPO के साथ-साथ SJPU, JJB, CWC, DLSA और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के नंबर भी प्रदर्शित किए जाएं और थानों में चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर को प्रभावी बनाया जाए।


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