ओवरलोड बालू वाहनों पर रोक की मांग, ट्रक यूनियनों ने अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

ब्यूरो चीफ संदिप कुमार की रिपोर्ट 

कैमूर:--जिले की सड़कों से होकर गुजर रहे ओवरलोड बालू लदे वाहनों के खिलाफ ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन और ट्रक यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने जिले के वरीय अधिकारियों से मुलाकात कर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की मांग की। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि नियमों के तहत अंडरलोड बालू का परिवहन करने वाले वाहन संचालकों को ओवरलोड वाहनों के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में ओवरलोड बालू लदे वाहन कैमूर की सीमा से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के रास्ते उत्तर प्रदेश की ओर जाते हैं। यूनियन के सदस्यों ने परिवहन और खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि जिले में अधिकारियों की तैनाती और जांच व्यवस्था के बावजूद ओवरलोड वाहनों का परिचालन जारी है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बिचौलियों और कथित 'एंट्री' व्यवस्था के माध्यम से वाहनों को पार कराने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ट्रक ऑपरेटरों के अनुसार, पूर्व में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती थी, लेकिन हाल के समय में ऐसी कार्रवाई अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि यदि लगातार जांच और कार्रवाई की जाए तो नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी कुमार अनुराग, पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी, खनन पदाधिकारी कार्तिक तथा जिला परिवहन पदाधिकारी से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। ट्रक यूनियनों ने अधिकारियों से नियमित वाहन जांच, ओवरलोडिंग पर कार्रवाई और नियमों का पालन करने वाले वाहन संचालकों को समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में बनारस ट्रक एसोसिएशन और कैमूर ट्रक यूनियन के उपाध्यक्ष राकेश सिंह के अलावा प्रमोद कुमार सिंह, मनीष राज गौरव, विकास गुप्ता, छगूर यादव, विक्की गुप्ता और सौरव जायसवाल समेत अन्य सदस्य शामिल थे। ट्रक यूनियन ने कहा कि ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में नियमों का पालन करने वाले वाहन संचालकों के सामने कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों और वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।

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