बिहार में जेल विजिटर नियुक्ति में पारदर्शिता की मांग, मानवाधिकार
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Sep 22, 2026
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रोहतास ।बिहार में जेल विजिटर एवं बोर्ड ऑफ विजिटर्स की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच बंदी अधिकार आंदोलन ने सरकार से मांग की है कि यह नियुक्ति महज औपचारिकता न बनकर रहे।
संवाददाता पारस नाथ दुबे डेहरी रोहतास।आंदोलन के समन्वयक संतोष उपाध्याय ने कहा कि जेल विजिटर के रूप में ऐसे स्वतंत्र और संवेदनशील लोगों का चयन होना चाहिए जिन्हें मानवाधिकार, बंदी अधिकार, विधिक सहायता, सामाजिक कार्य और जेल सुधार का जमीनी अनुभव हो।
उपाध्याय ने कहा, "जेल में बंद व्यक्ति भी संविधान द्वारा प्रदत्त मानव गरिमा और मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं होता। इसलिए जेल की निगरानी केवल जेल प्रशासन के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। स्वतंत्र एवं प्रभावी विजिटर व्यवस्था जेल सुधार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।"
उन्होंने कहा कि मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 और बिहार कारा हस्तक में विजिटर्स की व्यवस्था का उद्देश्य जेल की वास्तविक स्थिति की निगरानी करना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।
आंदोलन ने मांग की है कि महिला बंदियों की विशेष समस्याओं को देखते हुए महिला विजिटर्स की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित की जाए। विजिटर को बंदियों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने की सुविधा मिलनी चाहिए और भोजन, पानी, शौचालय, चिकित्सा, कानूनी सहायता, शिक्षा, महिला सुविधाएं और शिकायत निवारण की जमीनी हकीकत परखनी चाहिए।
साथ ही आंदोलन ने चार प्रमुख मांगें रखीं - प्रत्येक जेल में गैर-सरकारी विजिटर का नाम, मोबाइल नंबर और निरीक्षण का दिन सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हो।
हर निरीक्षण की लिखित रिपोर्ट और उस पर एक्शन टेकेन रिपोर्ट समय पर आए।
नियुक्ति के बाद सभी विजिटर्स को अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए।
चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और आवेदन आमंत्रित किए जाएं।
संतोष उपाध्याय ने कहा कि जेल विजिटर की नियुक्ति पद बांटने का विषय नहीं, बल्कि जेल के भीतर संविधान और मानव गरिमा की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपने का विषय है।


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