सत्यगाथा

खाकी हैं हिटलर बनी हुआ हाल बेहाल 

धू  , धू करते  जल  रहा , पूरा ही बंगाल 

पूरा  ही  बंगाल , कही  पर   होता  दंगा 

कही   बोलते   खादी   वाले   गुंडे  रंगा 

कह बृजेश कविराय यूं पल मे बदले रंग 

तालिबानी  सोच बढ़ी , दहल रहा हैं बंग 


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